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Shivaji Statue: शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने की जांच शुरू, दावा- मिट्टी के मॉडल को निदेशालय ने दी थी मंजूरी

Fri, 30 Aug 2024 07:47 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मालवन में सतरहवीं सदी के मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज की मूर्ति का अनावरण पिछले साल नौसेना दिवस यानी 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके महज आठ महीने बाद ही 26 अगस्त की दोपहर को यह गिर गई थी।
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शिवाजी महाराज की प्रतिमा। - फोटो : PTI
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विस्तार
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सिंधुदुर्ग में ढही शिवाजी महाराज की मूर्ति गिरने के मामले में जांच शुरू हो गई है। जांच में दावा किया गया है कि मूर्तिकार ने शिवाजी महाराज की मूर्ति का छह फुट का मिट्टी का मॉडल राज्य कला निदेशालय को सौंपा था। इसे पिछले साल निदेशालय ने मंजूरी दी थी। वहीं निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि निदेशालय प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के चेहरे और अन्य शारीरिक विशेषताओं को मानक अनुसार पाने के बाद मूर्तियों को मंजूरी देता है। 

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तटीय कोंकण के मालवन में सतरहवीं सदी के मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज की मूर्ति का अनावरण पिछले साल नौसेना दिवस यानी 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके महज आठ महीने बाद ही 26 अगस्त की दोपहर को यह गिर गई थी। इस घटना को लेकर विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) ने महाराष्ट्र सरकार की तीखी आलोचना की है। वहीं घटना के बाद पुलिस ने मूर्तिकार जयदीप आप्टे के खिलाफ मामला दर्ज किया। साथ ही इसके संरचनात्मक सलाहकार चेतन पाटिल को गिरफ्तार कर लिया।

एक अधिकारी ने बताया कि राजकोट किले में स्थापित करने के लिए प्रस्तावित शिवाजी महाराज की प्रतिमा का छह फुट का मिट्टी का मॉडल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी के लिए निदेशालय में प्रस्तुत किया था। इसे निदेशालय ने सात अगस्त 2023 को मंजूरी दी थी। निदेशालय के अधिकारी के मुताबिक नियमों के तहत प्रतिमा बनाने वाली एजेंसी को निदेशालय की मंजूरी लेनी होती है। इसमें यह अनुमति दी जाती है कि कांस्य, फाइबर या किसी अन्य सामग्री से बनी प्रतिमा अनुमोदित स्केल मॉडल के अनुसार बनाई गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के आकार को लेकर कही जा रही बात गलत है। कहा जा रहा है कि निदेशालय द्वारा छह फुट ऊंची मूर्ति को मंजूरी देने के बावजूद मूर्तिकार ने शिवाजी महाराज की 35 फुट की मूर्ति बनाई। 
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निदेशालय के अधिकारी ने बताया कि किसी भी मूर्ति को मंजूरी देते समय जे जे इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स के विशेषज्ञ मॉडल की जांच करते हैं और उसके व्यक्तित्व की विशेषताओं को परखते हैं। अधिकारी ने कहा कि किसी भी प्रतिमा को मंजूरी देते समय हम यह सुनिश्चित करते हैं कि महान व्यक्तित्व की पहचान उसकी विशेषताओं के माध्यम से ठीक से की जा सके। प्रतिमा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री तय करने में निदेशालय की कोई भूमिका नहीं है। निदेशालय के अधिकारियों ने राज्य सरकार से नए दिशानिर्देश लाने और कलाकारों के लिए निदेशालय से अंतिम मंजूरी लेना अनिवार्य बनाने की मांग की।
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