कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत कुमार (पीके) सामने ही बुधवार को कांग्रेसियों ने जमकर हंगामा काटा। बलिया केजिलाध्यक्ष के विरोधी और समर्थकों द्वारा के बीच हुए हंगामा केदौरान कुर्सियां भी चलीं। कार्यकर्ताओं की यह स्थिति देख पीके जहां हतप्रभ थे, वहीं प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता समझाने का प्रयास करते रहे। काफी देर बाद दोनों पक्षों को समाझा बुझाकर माहौल शांत कराया गया। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में 28 मई तक चलने वाली मंडलवार बैठक के तहत पीके को आज मिर्जापुर व आजमगढ़ मंडल के जिला पदाधिकारियों केसाथ बैठक करना था।
उन्होंने आजमगढ़ मंडल केसाथ मऊ व बलिया के पदाधिकारियों के साथ जैसे ही बैठक शुरू किया तो बलिया केकुछ कार्यकर्ता पार्टी के जिलाध्यक्ष के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कई आरोप लगाने लगे। इस पर वहां मौजूद जिलाध्यक्ष के समर्थकों ने भी मोर्चा खोल दिया। देखते-देखते ही दोनों पक्ष में तू-तू मैं-मैं होने लगी। नाराज कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी किया। इसी बीच कुछ लोगों ने वहां रखी कुर्सियां उछाल दीं, तो दूसरी तरफ से दो-चार कुर्सियां फेंकी गई।
इधर हंगामा होता रहा और उधर पीके चुपचाप तमाशा देखते रहे। स्थिति बिगड़ती देख वहां मौजूद बड़े नेताओं ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद फिर से बैठक शुरू हुई। हालांकि बालिया की बैठक जल्द समाप्त हो गई। इसके बाद पीके ने मिर्जापुर, सोनभद्र व संत रविदास नगर के कांग्रेसजनों केसाथ बैठक की। इस मौकेपर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री, प्रशान्त किशोर, पूर्व मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी, पूर्व एमएलसी हरीश बाजपेयी व पूर्व सांसद अन्नू टंडन समेत सभी फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे। 26 मई को बस्ती, फैजाबाद एवं चित्रकूट मंडलों के कांग्रेसजनों की बैठक होगी।
पीके की टिप्पणी पर भी खूब हुई चर्चा
-बैठक समाप्त होने के बाद पीके की टिप्पणी को लेकर भी बाहर कुछ लोग चर्चा करते सुने गए। चर्चाओं के मुताबिक बैठक के दौरान पीके ने कार्यकर्ताओं से कहा कि विधान सभा का चुनाव लड़ने के लिए करीब 9 हजार लोग कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि यूपी में कांग्रेस का क्रेज कम हैं। इसी क्रम में पीके ने यह भी कह दिया कि कई लोग तो चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि अपना बैंक-बैलेंस बढ़ाने के लिए टिकट मांग रहे थे। पीके की इस टिप्पणी को लेकर बाहर कुछ लोगों ने हैरानी भी जताई। उनका कहना था कि बैठक में सार्वजनिक तौर पर इस तरह की टिप्पणी करना गलत है।