उच्चतम न्यायालय ने मंलवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें चुनाव आयोग को मतपत्रों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से पार्टी चिह्न हटाने और उसकी जगह उम्मीदवारों की उम्र, शैक्षणिक योग्यता और फोटो लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
दरअसल, एक संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में पिटीशन दाखिल कर मांग की थी कि मतदान के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स (ईवीएम) में उम्मीदवार के पार्टी के चुनाव चिह्न की जगह उसकी उम्र, उसकी शैक्षिक योग्यता और फोटो लगी हो। याचिका में अनुरोध किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट इसके लिए चुनाव आयोग को निर्देश दे।
याचिका में कहा गया था कि इस तरह के कदम से मतदाताओं को बुद्धिमान, मेहनती और ईमानदार उम्मीदवारों को वोट और समर्थन देने में मदद मिलेगी। साथ ही टिकट बांटने में राजनीतिक दलों के हाई कमांड की मनमानी पर लगाम भी लगाई जा सकेगी। इस याचिका पर मौजूदा चीफ जस्टिस यूयू ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की पीठ सुनवाई कर सकती है।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में ईवीएम पर पार्टी चिह्न के उपयोग को अवैध और असंवैधानिक करार देने की मांग भी की गई है। इसमें कहा गया है कि राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराधिकरण को खत्म करने के लिए ईवीएम और बैलट में पार्टी के चुनाव चिह्न की जगह उम्मीदवारों की जानकारी सबसे उपयुक्त हल है।