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सफलता : हर साल डेढ़ लाख जान लेने वाले स्क्रब टाइफस का अब बेहतर इलाज, इस बीमारी से 6 फीसदी मरीजों की मौत

Tue, 07 Mar 2023 07:26 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

स्क्रब टाइफस के इन्ट्रावेनस ट्रीटमेंट के डाटा का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने स्क्रब टाइफस से गंभीर रूप से पीड़ित रोगियों पर एंटीबायोटिक (डॉक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन) के असर और सुरक्षा का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसके अलावा दोनों दवाओं का संयोजन में भी इस्तेमाल किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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देश में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित और 1.50 लाख लोगों की जान लेने वाले स्क्रब टाइफस का शोधकर्ताओं ने बेहतर इलाज खोजा है। सीएमसी वेल्लोर की टीम ने इस खोज के लिए माहिडोल ऑक्सफोर्ड ट्रॉपिकल मेडिसिन रिसर्च यूनिट, थाईलैंड और वेलकम ट्रस्ट थाईलैंड एशिया एंड अफ्रीका प्रोग्राम के शोधकर्ताओं का सहयोग किया। इसके अलावा पीजीआई चंडीगढ़, आईजीएमसी शिमला, पीजीआईएमएस रोहतक, जिपमर पांडिचेरी, सीएमसी वेल्लोर, एसवीआईएमएस तिरुपति और केएमसी मणिपाल इसके परीक्षणों मे शामिल हुए। शोध के दौरान डॉक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोमाइसिन दवाओं के जरिये स्क्रब टाइफस का इलाज किया। अध्ययन का प्रकाशन हाल ही में द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में हुआ है।

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स्क्रब टाइफस के इन्ट्रावेनस ट्रीटमेंट के डाटा का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने स्क्रब टाइफस से गंभीर रूप से पीड़ित रोगियों पर एंटीबायोटिक (डॉक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन) के असर और सुरक्षा का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसके अलावा दोनों दवाओं का संयोजन में भी इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में पता चला के दोनों दवाओं को अलग-अलग देने की बजाय एक साथ देना ज्यादा असरदार है। 

चूहों से इन्सानों में फैलने वाली बीमारी
ओरिएंटिया सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से संक्रमित होने के बाद चूहों में पनपे ट्रॉम्बिक्युलिड माइट्स के लार्वा से यह बीमारी मनुष्यों फैलती है। यह खासतौर पर अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर पनपती है।
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ज्यादातर मरीजों को सातवें दिन छुट्टी
शोध से जुड़े सीएमसी वेल्लोर के प्रोफेसर जॉर्ज एम वर्गीस ने बताया कि एजिथ्रोमाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन मिलाकर उपचार करने से ज्यादातर मरीजों को सातवें दिन तक अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इन दोनों दवाओं के प्रभाव से सांस फूलने का सिंड्रोम (एआरडीएस), हेपेटाइटिस, हाइपोटेंशन-शॉक, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और गुर्दे के काम नहीं करने जैसी तकलीफें दूर हो जाती हैं। प्रो. वर्गीस ने बताया कि फिलहाल यह नहीं पता चल पाया है कि दोनों दवाओं के संयोजन से क्यों ज्यादा लाभ मिला है।

ये होते हैं लक्षण
स्क्रब टाइफस में आमतौर पर बुखार के साथ सिरदर्द, खांसी, सांस की तकलीफ और मन भ्रमित रहने के लक्षण दिखते हैं। निदान और उपचार के बावजूद स्क्रब टाइफस से संक्रमित छह फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। बीमारी के गंभीर रूप लेने पर शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। इससे अलावा रक्तचाप बहुत कम हो जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से गंभीर मरीजों के मरने की आशंका 70 फीसदी तक होती है।

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