SCO से बाहर निपटें भारत-पाक, दोनों के आपसी मामले को लेकर चार्टर में ही चीन ने लगा दिया 'वीटो'!
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शंघाई सहयोग संगठन में आते ही भारत और पाकिस्तान आठ देशों के उस विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं, जिन्हें नाटो की तरह ही मजबूत माना जा रहा है। पर खास बात ये है कि भारत और पाकिस्तान इस 8 सदस्यीय खास संगठन एससीओ में अपने आपसी विवादों का निपटारा नहीं कर पाएंगे। दोनों ही देशों को अपने आपसी विवादों को एससीओ से बाहर ही निपटाना होगा, ताकि भविष्य में दोनों ही देशों के आपसी संबंध कितनी भी बिगड़ें, पर एससीओ के कामकाज पर इससे कोई फर्क नहीं पड़े। दरअसल, एससीओ के चार्टर में ही चीन की तरफ से ये बात जोड़ दी गई है कि दोनों देश अपने आपसी मसलों को एससीओ में नहीं उठा पाएंगे, जिस तरह से पाक कश्मीर मुद्दे को लेकर दुनिया भर के मंचों पर उठाने की कोशिश करता रहा है।
बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन के हेडक्वार्टर में एससीओ का चार्टर जारी किया गया, जिसमें संगठन के उद्देश्यों के बारे में बताया गया है। इसमें चीन ने साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में कितनी भी कड़वाहट क्यों न आए, उससे एससीओ के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। इसीलिए चार्टर में ही उनके वीटो लगाते हुए ये शर्त भी जोड़ दी है कि भारत और पाकिस्तान अपने आपसी विवादित मसलों को एससीओ में नहीं उठा पाएंगे। वो अपने द्विपक्षीय मामलों को आपस में निपटाएंगे।
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एससीओ में भारत और पाक की आधिकारिक एंट्री के लिए एससीओ हेडक्वार्टर में आयोजित कार्यक्रम में चीन के सहायक विदेश मंत्री कोंग झुआंयू ने कहा कि एससीओ का संस्थापक सदस्य होने के नाते चीन भारत और पाक का संगठन में स्वागत करता है। इसी साल चीन एससीओ का अध्यक्ष बना है। पिछले साल कजाखस्तान एससीओ का अध्यक्ष था।
कोंग झुआंयू ने कहा कि एससीओ आपसी झगड़ों का निपटारा करने के लिए बनाया गया मंच नहीं है। सभी सदस्य देश अपने मतभेद एससीओ से बाहर ही निपटाएं। एससीओ के चार्टर में इस बात का साफ तौर पर उल्लेख है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान भी इससे बंधे हैं। उन्होंने कहा कि एससीओ के नियम सभी सदस्यों के लिए बाध्यकारी है।