दुनिया के 17 से भी ज्यादा देशों के कोरोना वायरस के प्रकार भारत में अब तक मिल चुके है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने वायरस की आनुवांशिक विविधता को जानने के लिए अध्ययन का फैसला लिया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का बायोटेक्नॉलोजी विभाग एक हजार और सीएसआईआर 100 सैंपल का अध्ययन करेगा।
डीबीटी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना को समझना बेहद जरूरी है अन्यथा हम इसे लेकर बेहतर प्रबंधन नहीं बना सकते। हमारे यहां अब तक 17 देशों के कोरोना वायरस मिल चुके हैं। इसलिए सटीक परिणाम मिलने के लिए हमें देश के हर राज्य की स्थिति का पता होना जरूरी है, ऐसा तभी होगा जब हम वहां के संक्रमण का परीक्षण करें।
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ महामारी विशेषज्ञ के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, एमपी, दिल्ली, तमिलनाडु में मरीज ज्यादा हैं। सबसे कम रिकवरी दर गुजरात में है। इसके पीछे वजह संक्रमण का स्ट्रेन है जोकि बाकी राज्यों से अलग है।
यहां एल टाइप का स्ट्रेन मिला है जो वुहान में था। जबकि कुछ राज्य में एस स्ट्रेन भी मिला है। ठीक इसी तरह इंदौर में कोरोना का अलग स्ट्रेन मिलने का अंदेशा है क्योंकि वहां यह ज्यादा तीव्र है। अभी इसकी जांच भी चल रही है।