फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर डरा रहा कोरोना: एनआईवी की टीम ने शुरू की जेएन.1 को अलग करने की प्रक्रिया, जानेंगे टीके का असर

Mon, 25 Dec 2023 06:08 AM IST
शिव शरण शुक्ला परीक्षित निर्भय

सार

 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने कोरोना के उप स्वरूप जेएन.1 को आइसोलेट यानी पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी
विज्ञापन
कोरोना के जेएन.1 वैरिएंट से जुड़ी प्रमुख बातें (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : amar ujala graphics
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने कोरोना के उप स्वरूप जेएन.1 को आइसोलेट यानी पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें कामयाबी मिलने के बाद इस पर मौजूदा टीकों के असर का पता लगाया जाएगा।

विज्ञापन


एनआईवी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक, वायरस को पृथक करने के लिए हेवी वायरल लोड की आवश्यकता होती है। साल 2020 में जब पहली बार कोरोना को पृथक किया जा रहा था उस दौरान नमूने में हेवी वायरल लोड न होने की वजह दो बार असफलता मिली थी। इस बार केरल के अस्पतालों में गंभीर रूप से भर्ती मरीजों को चुना गया और उनके नमूने मंगाकर स्वरूप को अलग करने का काम शुरू किया गया है। 

एनआईवी के अनुसार, जेएन.1 उप स्वरूप को लेकर विश्व में काफी कम साक्ष्य मौजूद हैं। अभी तक जीनोम सीक्वेंसिंग और उससे प्राप्त आनुवंशिक चार्ट के अलावा और  कुछ हमारे पास नहीं है। आइसोलेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हमारे  पास जीवित वायरस होगा, जिसका इस्तेमाल अध्ययनों में कर सकेंगे।
विज्ञापन


फिलहाल चौथी खुराक की जरूरत नहीं
इस बीच कोविड-19 टीकाकरण की राष्ट्रीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि अभी चौथी खुराक लेने की कोई जरूरत नहीं है। फिलहाल जिन लोगों की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है या फिर जिन्हें पहले से सह बीमारियां हैं, साथ ही साथ इन्होंने तीसरी खुराक अब तक नहीं ली है। ऐसे लोगों को टीका की तीसरी खुराक लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

चूहों को पहले देंगे टीका, फिर वायरस
जेएन.1 उप स्वरूप को आइसोलेट करने के बाद वैज्ञानिकों ने सीरियाई चूहों पर अध्ययन करने का फैसला लिया है, जिसके अनुसार पहले चूहों को भारत के राष्ट्रीय कोरोना रोधी टीकाकरण में शामिल टीकों की खुराक दी जाएगी। इसमें कोवाक्सिन और कोविशील्ड भी शामिल है। इसके कुछ समय बाद एंटीबॉडी विकसित होने पर उन्हें जेएन.1 उप स्वरूप की डोज देंगे, ताकि यह पता चल सके कि टीकाकरण कराने वालों में यह किस तरह काम कर रहा है? नया टीका या अन्य टीके की खुराक लेनी है या नहीं इस अध्ययन से पता लगाएंगे।

भारत के लिए चिंता
एनआईवी के वैज्ञानिकों का कहना है कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में अभी स्थिति काफी बेहतर है, लेकिन अब तक जो आंकड़े सामने आए हैं वह बताते हैं कि भारत में 6.98 फीसदी सैंपल जेएन.1 से जुड़े हैं, जो कनाडा (6.8%), यूके (5.6%) और स्वीडन (5.0%) से अधिक है। पर, फ्रांस (20.1%), अमेरिका (14.2%) और सिंगापुर (12.4%) से स्थिति बेहतर है।
विज्ञापन


एक दिन में 656 लोग संक्रमित
देशभर में पिछले 24 घंटों के दौरान 656 केस मिले हैं। सक्रिय मामलों की संख्या 3, 742 हो गई है। वहीं, संक्रमण से केरल में एक और मरीज की मौत हो गई है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें