यह आधिकारिक हो चुका है कि हम मेघालय युग में जी रहे हैं। भूवैज्ञानिकों ने धरती के इतिहास में एक नए काल/युग की खोज की है और इसका नाम मेघालय रखा गया है क्योंकि यहां की एक गुफा की छत से टपक कर फर्श पर जमा हुए चूने के ढेर या स्टैलेगमाइट को जमा किया। इसने धरती के इतिहास में 4,200 साल पहले घटी सबसे छोटी जलवायु घटना को परिभाषित करने में मदद की। जिससे उस युग की शुरुआत हुई जो आज तक जारी है।
मेघालय युग उस समय शुरू हुआ जब अचानक दुनियाभर में भयंकर सूखा पड़ गया था और तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई थी। इसकी वजह से विश्व की कई
सभ्यताएं खत्म हो गई थीं। जिसमें इजिप्ट से लेकर चीन तक की सभ्यताएं शामिल हैं। यह लंबी अवधि का वह हिस्सा है जो होलोसीन युग के रूप में जाना जाता है, जो पिछले 11,700 सालों के दौरान हुए सभी घटनाक्रम को दर्शाता है।
मेघालय युग काफी यूनिक है क्योंकि यह पृथ्वी के
भूवैज्ञानिक इतिहास में पहला अंतराल है। 4.6 अरब साल के धरती के इतिहास को कई कालखंडों में बांटा गया है। हर कालखंड की महत्वपूर्ण घटनाओं जैसे कि महाद्वीपों का टूटना, पर्यावरण में नाटकीय बदलाव या धरती पर खासतरह के जानवरों, पौधों की उत्पत्ति शामिल है। हम इस समय होलोसीन युग में जी रहे हैं। यह वह समय है जब हम नाटकीय गर्मी की वजह से हिम युग से बाहर आए थे।
इनमें सबसे युवा 'मेघालय युग' 4200 साल पहले से लेकर 1950 तक माना जाता है। इसकी शुरुआत भयंकर सूखे से हुई थी, जिसका असर दो शताब्दियों तक रहा था। वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतिम हिम युग की समाप्ति के बाद कई क्षेत्रों में विकसित हुए कृषि आधारित समाज पर इस मौसमी घटना ने गंभीर प्रभाव डाला था। इसके परिणामस्वरूप मिस्र, यूनान, सीरिया, फिलिस्तीन, मेसोपोटामिया, सिंघु घाटी और यांग्त्से नदी घाटी की सभ्यताएं प्रभावित हुई थीं।