प्रस्तावित लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण नियमन 2021 (एलडीएआर) समस्याओं से भरा है और लक्षद्वीप की पारिस्थितिकी, आजीविका एवं संस्कृति को सुरक्षित रखने वाले मौजूदा लचीले कानूनी प्रावधानों के खिलाफ काम करेगा। वर्षों तक द्वीप पर काम करने वाले विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों के समूह ने ये बातें कहीं।
बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में लक्षद्वीप रिसर्च कलेक्टिव ने कहा कि उसने वैज्ञानिक समुदाय के 60 अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं के साथ मिलकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर उनसे लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 के ‘समस्या से भरे मसौदे’ को वापस लेने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
बयान में कहा गया, स्थानीय भूमि के अधिग्रहण को सक्षम बनाने वाले इस मसौदा नियमन में हमने पाया है कि यह मौजूदा कानूनों जैसे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013, जैविक विविधता अधिनियम 2002, पर्यावरण (संरक्षण) कानून, 1986 के अनुरूप नहीं है।