विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अपना पहला जैविक प्रयोग करने जा रहा है। इस अध्ययन का मकसद अंतरिक्ष में इंसानी जीवन की संभावना को तलाश करना है। इस प्रयोग को बायोई3 नामक एक महत्वपूर्ण पहल के तहत किया जाएगा।
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स्पाइरुलिना और साइनोकोकस जैसे साइनोबैक्टीरिया के विकास पर भी होगा अध्ययन
आईएसएस में दूसरा प्रयोग यह पता लगाने के लिए किया जाएगा कि स्पाइरुलिना और साइनोकोकस जैसे साइनोबैक्टीरिया सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में कैसे बढ़ते हैं, खासकर जब उन्हें यूरिया और नाइट्रेट जैसे पदार्थों से पोषण दिया जाता है। सिंह ने कहा कि इस प्रयोग का उद्देश्य अंतरिक्ष में मनुष्य के शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट (जैसे यूरिया) को कैसे दोबारा इस्तेमाल कर भोजन और अन्य जरूरी चीजें बनाने के लिए अध्ययन करना है। स्पाइरुलिना को एक 'सुपरफूड' माना जाता है क्योंकि इसमें बहुत सारा प्रोटीन और विटामिन होता है।
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