उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य के पहाड़ी और घाटी जिलों में स्थापित बंकरों को हटा दिया जाएगा, जबकि मैतई और कुकी दोनों किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अतिरिक्त राज्य बलों को तैनात किया गया है ताकि कृषि गतिविधियां शुरू हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'कक्षा एक से आठ तक के स्कूल पांच जुलाई से शुरू होंगे।' पूर्वोत्तर राज्य में तीन मई को जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। राज्य में शांति लाने के लिए सेना और अन्य केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है, जहां मैतई और कुकी समुदायों के बीच दो महीने तक हिंसा जारी रही, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए, कई घायल हो गए और बड़ी संख्या में घर और पूजा स्थल जल गए।
उन्होंने कहा, 'हम एक होकर रहे हैं और एक होकर रहना जारी रखेंगे... जिले सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाए गए थे।' कृषि कार्य शुरू करने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस बलों के उन 2,000 कर्मियों को जुटाया गया है जो सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों से जुड़े थे।'
सिंह ने कहा, 'वे अब किसानों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे और भीड़ के उपद्रव से निपटेंगे।' मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले दिन में एक संयुक्त सुरक्षा बैठक हुई थी। उन्होंने कहा, 'यह फैसला किया गया कि पहाड़ी और घाटी जिलों में स्थापित बंकरों को परसों से हटा दिया जाएगा। सेना निजी और समूह बंकरों को हटाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य बलों के संयुक्त बल का नेतृत्व करेगी।'
मणिपुर की आबादी में मैतई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी नगा और कुकी आबादी का 40 फीसदी हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग बेघर हो गए हैं और राहत केंद्रों में रह रहे हैं, उन्हें एक महीने के भीतर पूर्व-निर्मित घरों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा क्योंकि ऐसे घरों का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।