सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की याचिका दाखिल की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्तूबर को दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दे दी। यह विवाद विपक्षी नेताओं को सीजेआई से मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद शुरू हुआ।
क्या है पूरा मामला?
विपक्षी दलों के नेताओं ने सीजेआई सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे चुनाव प्रक्रिया और दूसरे मुद्दों पर अपनी चिंताओं से जुड़ा ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल थे। हालांकि, सीजेआई ने मुलाकात से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा की मांग की जा रही है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित हैं। ऐसे मामलों पर अलग से बैठक करना न्यायिक मर्यादा और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा। उन्होंने विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने के लिए अदालत में याचिका दाखिल करने का रास्ता सुझाया।
निखिल वागले ने एक्स पर क्या लिखा था?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका के मुताबिक, सीजेआई के मुलाकात से इनकार करने से जुड़ी खबर सामने आने के बाद निखिल वागले ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। याचिका में उनकी पोस्ट के शब्दों को आपत्तिजनक बताते हुए कहा गया कि इससे सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई। हालांकि, वागले ने बाद में पोस्ट हटा दी।
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संजय राउत के बयान पर क्यों उठा विवाद?
याचिका में संजय राउत के बयानों को भी आधार बनाया गया है। राउत ने न्यायाधीशों के भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों की ओर से उनके लिए रात्रिभोज आयोजित किए जाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने न्यायाधीशों की राजनीतिक हस्तियों के साथ बैडमिंटन खेलने वाली तस्वीरों का भी जिक्र किया था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इन बयानों को तथ्यात्मक रिकॉर्ड के विपरीत बताया है।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून 2026 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ बैडमिंटन खेलने के नाम पर प्रसारित तस्वीरें वास्तव में नवंबर 2025 में नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम की थीं। अदालत ने संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश भी दिया था।
अटॉर्नी जनरल ने क्या कहा?
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर विचार करने के बाद 1971 के अदालत की अवमानना कानून की धारा 15(1)(बी) के तहत आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दी। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों की टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट और खास तौर पर सीजेआई की प्रतिष्ठा कम करने वाली प्रतीत होती हैं। उन्होंने राउत के न्यायाधीशों के भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने संबंधी दावों को तथ्यहीन बताया और कहा कि सांसद को ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए थी।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने क्या मांग की?
बार एसोसिएशन ने अदालत से दोनों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उसने एक्स, मेटा, गूगल और आईएएनएस से संबंधित पोस्ट, वीडियो और खातों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान दोनों को सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाने से रोका जाए।