पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गुटबाजी के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने पुलिस पर विरोधी गुट के पक्ष में हलफनामे जुटाने का आरोप लगाया है। पार्टी की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डोला सेन ने गुरुवार को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर कथित दबाव और स्टांप पेपर के वितरण में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
यह विवाद विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में विभाजन के चलते चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और फंड पर दावों को लेकर चल रही कार्यवाही के बीच सामने आया है। डोला सेन के मुताबिक, चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से अपने समर्थकों के हलफनामे और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा है। इसके लिए 26 अक्तूबर तक का समय दिया गया है।
पुलिस पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराने का आरोप
पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में सेन ने आरोप लगाया कि राज्यभर में पुलिसकर्मियों को ऐसे लोगों से भी हलफनामे जुटाने के निर्देश दिए गए हैं, जो टीएमसी के सदस्य नहीं हैं। उनके मुताबिक, इन हलफनामों का इस्तेमाल विरोधी गुट के दावे को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
ममता बनर्जी खेमे ने आरोप लगाया कि पुलिस थानों के अधिकारी विरोधी गुट के पक्ष में लोगों से दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल कर हस्ताक्षर करा रहे हैं। पत्र में इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी और अरूप रॉय के हाथों में बताया गया है। सेन ने दावा किया कि बंगाल के प्रत्येक पुलिस थाने से कथित तौर पर 1,100 से अधिक हलफनामे जुटाने को कहा गया है। राज्य में 607 पुलिस थाने होने के आधार पर उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कम से कम छह लाख हलफनामे शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हलफनामों को प्रमाणित कराने के लिए पुलिस थानों में नोटरी की व्यवस्था की गई है। सेन ने दावा किया कि ममता बनर्जी के साथ ही पार्टी का वास्तविक समर्थन बना हुआ है और विरोधी गुट के पास जनाधार नहीं है।
स्टांप पेपर की आपूर्ति पर भी सवाल
डोला सेन ने राज्य के मुख्य सचिव, पंजीकरण महानिरीक्षक, स्टांप राजस्व आयुक्त और संबंधित अधिकारियों को अलग पत्र भेजा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाधिकारियों ने स्टांप विक्रेताओं को बड़ी संख्या में स्टांप पेपर पुलिस को उपलब्ध कराने के लिए कथित तौर पर मनमाने और लिखित रूप में दर्ज नहीं किए गए निर्देश दिए हैं।
पत्र के अनुसार, प्रत्येक उप-पंजीयक कार्यालय में 10 रुपये मूल्य के करीब 25,000 स्टांप पेपर उपलब्ध कराने और उन्हें संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए जाने का आरोप है। सेन ने यह भी दावा किया कि जरूरत पड़ने पर 20 रुपये मूल्य के स्टांप पेपर भी संबंधित रजिस्टर में प्रविष्टि किए बिना उपलब्ध कराने को कहा गया है।
उन्होंने इन कथित निर्देशों को अवैध बताते हुए अधिकारियों से ऐसी गतिविधियां रोकने की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस द्वारा बड़ी मात्रा में स्टांप पेपर खरीदे जाने से राज्य में कृत्रिम कमी पैदा हो गई है। इसके कारण ममता बनर्जी खेमे के कार्यकर्ताओं को अपने हलफनामे तैयार करने के लिए स्टांप पेपर हासिल करने में परेशानी हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
पुलिस अधिकारियों को लिखे पत्र में सेन ने सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर दोनों पक्षों के दावों पर फैसला करने का निर्देश दिया था। साथ ही, दोनों पक्षों को हलफनामे और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए उस तारीख से चार सप्ताह का समय दिया गया था।
सेन ने अधिकारियों से राजनीतिक कार्यकर्ताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और राज्य सरकार या उसके अधिकारियों के कथित निर्देशों पर कार्रवाई नहीं करने की अपील की। उन्होंने केंद्र और राज्य की भाजपा नीत सरकारों पर चुनाव आयोग के समक्ष चल रही कार्यवाही के नतीजे को प्रभावित करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा, राज्य पुलिस या टीएमसी के विरोधी गुट की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।