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सही हकदार को वापस मिलेगी ठगी गई रकम: साइबर अपराधियों की 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' तैयार, 25698 करोड़ का लेनदेन रोका

Tue, 28 Jul 2026 10:24 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला
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इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (सीएफसीएफआरएमएस) के फायदे नजर आने लगे हैं। इस सिस्टम को को 2021 में लॉन्च किया गया था, ताकि फाइनेंशियल फ्रॉड की तुरंत रिपोर्ट की जा सके। फ्रॉड करने वालों को पैसे निकालने से रोका जा सके। I4C द्वारा चलाए जा रहे सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 30 जून तक 32.80 लाख से ज़्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम बचाई गई है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ शुरू किया गया है। सही हकदार को ठगी गई रकम वापस मिलेगी।

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32.08 लाख 'लेयर 1 म्यूल अकाउंट' 
I4C ने बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10.09.2024 को साइबर अपराधियों की पहचान से जुड़ी जानकारी वाली एक 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' (संदिग्धों की सूची) शुरू की है। 30.06.2026 तक, बैंकों से संदिग्धों की पहचान से जुड़ा 30.48 लाख से अधिक डेटा और 32.08 लाख 'लेयर 1 म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले खाते) सस्पेक्ट रजिस्ट्री में शामिल संस्थाओं के साथ साझा किए गए हैं। 25,698 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन को रोका गया है।

ठगी के मामले में एक स्टैंडर्ड तरीका तय 
कामकाज की क्षमता को और बेहतर बनाने और साइबर क्राइम की शिकायतों को संभालने में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है। यह एसओपी शिकायत प्रोसेस करने, बैंकों के साथ तालमेल बिठाने, शिकायतों का समाधान करने, 'लियन मार्किंग' हटाने और एनसीआरपी के जरिए मिली शिकायतों के आधार पर ठगी गई रकम को सही हकदार को वापस दिलाने के लिए एक स्टैंडर्ड तरीका तय करता है। 
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अप्रैल 2026 से चालू 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल' .  
ठगी गई रकम को पीड़ितों को तेज़ी से वापस दिलाने के लिए 'मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल' और बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने व रकम पर 'लियन मार्किंग' से जुड़ी शिकायतों का समय पर समाधान करने के लिए 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल' अप्रैल 2026 से चालू कर दिए गए हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट की गई साइबर अपराध की घटनाओं, उन्हें एफआईआर में बदलने और उसके बाद की कार्रवाई (जैसे चार्जशीट दाखिल करना, गिरफ्तारी और शिकायतों का समाधान) को संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियां कानून के प्रावधानों के अनुसार संभालती हैं। 

खतरनाक डोमेन व फ़िशिंग गतिविधियों का पता 
सीईआरटी-इन लगातार नए साइबर खतरों/कमज़ोरियों (जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किए गए खतरनाक हमले भी शामिल हैं) और कंप्यूटर, नेटवर्क व डेटा की सुरक्षा के उपायों के बारे में अलर्ट और सलाह जारी करता रहता है। सीईआरटी-इन खतरनाक डोमेन और फ़िशिंग गतिविधियों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए एआई-आधारित सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए खतरों से पहले ही निपटने के लिए अलग-अलग सेक्टर के संगठनों के साथ खास अलर्ट शेयर करने के लिए एक ऑटोमेटेड साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस एक्सचेंज प्लेटफ़ॉर्म चलाता है।

132.93 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी 
गृह मंत्रालय ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्लूसी)' योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 132.93 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है। यह मदद उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए दी गई है, जैसे कि साइबर फ़ोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं बनाना, जूनियर साइबर कंसल्टेंट रखना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के कर्मचारियों, सरकारी वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देना। महाराष्ट्र सहित 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फ़ोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं शुरू की गई हैं। 24,600 से ज़्यादा एलईए कर्मचारियों, न्यायिक अधिकारियों और सरकारी वकीलों को साइबर अपराध के बारे में जागरूकता, जाँच, फ़ोरेंसिक आदि पर प्रशिक्षण दिया गया है।

'नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर' 
I4C के हिस्से के तौर पर, अत्याधुनिक 'नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर' (जिसे पहले 'नेशनल साइबर फ़ोरेंसिक लेबोरेटरी (इन्वेस्टिगेशन) {एनसीएफएल (I)}' के नाम से जाना जाता था) नई दिल्ली (18.02.2019 को) और असम (29.08.2025 को) में स्थापित किया गया है। इसका मकसद राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस के जाँच अधिकारियों (आईओ) को शुरुआती स्तर पर साइबर फ़ोरेंसिक सहायता प्रदान करना है। 30.06.2026 तक, नई दिल्ली स्थित नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर ने साइबर अपराधों से जुड़े 14,064 से ज़्यादा मामलों में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की एलईए को अपनी सेवाएँ दी हैं।

भारत में काम कर रहे 40 विदेशी बैंक शामिल 
फिलहाल, साइबर क्राइम के मामलों की जांच में मदद के लिए देश भर में 07 सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और 28 स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (महाराष्ट्र सहित) काम कर रही हैं। स्टेट एफएसएल में डीएनए एनालिसिस और साइबर फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने की 'निर्भया फंडेड स्कीम' के तहत, स्टेट एफएसएल में साइबर फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मदद दी गई है। 30.06.2026 तक, कुल 1,586 संस्थाओं को सीएफसीएफआरएमएस प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है, जिनमें भारत में काम कर रहे 40 विदेशी बैंक भी शामिल हैं। यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी है।

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