फिजूल की याचिका दायर करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बेकार की याचिका दायर कर किसी को अदालत का समय बर्बाद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति ने कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता टीजे अब्राहम पर फिजूल याचिका दायर करने पर 25 लाख रुपये का जुर्माना किया है। पीठ ने कहा कि यह जनहित याचिका के सिद्धांत का दुरुपयोग करना है। याचिकाकर्ता ने गुलबर्गा जिले के सरकारी दफ्तर के कॉम्प्लेक्स के शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना के खिलाफ याचिका दायर की थी।
पीठ ने कहा कि कॉम्प्लेक्स को छह किलोमीटर की दूर शिफ्ट करने का मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। इसमें जनहित जैसी कोई बात नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि जुर्माने की रकम बहुत बड़ी है।
उन्होंने जुर्माने को माफ करने की गुजारिश की लेकिन पीठ ने इनकार कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने के लिए कहा है।