West Bengal: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25,753 स्कूल कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने ममता बनर्जी से योग्य अभ्यर्थियों के लिए समिति बनाने का सुझाव दिया, जिसे सत्तारूढ़ टीएमसी ने खारिज कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताकर रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल में 25,753 स्कूल कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द किए जाने एक दिन बाद जज से सांसद बने अभिजीत गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वह महाधिवक्ता व वकीलों की एक समिति बनाएं, ताकि योग्य शिक्षक सेवा में आ सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में इस समिति में स्कूल सेवा आयोग के अध्यक्ष होने चाहिए और इसमें खुद वह (अभिजीत गंगोपाध्याय) भी शामिल हैं। पूर्व जज ने कहा कि ईमानदारी से नौकरी हासिल करने वाले सभी लोगों की सूची तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है।
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हालांकि, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उनके सुझाव को खारिज किया और कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के बाद इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को राज्य संचालित और राज्य-सहायता प्राप्त विद्यालयों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को दोषपूर्ण और दागदार करार दिया। चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने नियुक्तियों को रद्द करते हुए 22 अप्रैल 2024 के कलकत्ता हाईको्ट के फैसले को बरकरार रखा।
पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने क्या कहा
गंगोपाध्याय ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, राजनीति से उठकर मेरी दीदी (ममता बनर्जी) से विनम्र अपील है कि वह ऐसी समिति गठित करने की पहल करें। जहां तक मेरी जानकारी और अनुभव है, उन लोगों के बीच अंतर करना संभव है, जिन्होंने फर्जी तरीकों से नौकरी हासिल की और जिन्होंने इसे अपनी योग्यता और कड़ी मेहनत से हासिल किया।
उन्होंने योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के लिए शीर्ष कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर करने का सुझाव दिया। गंगोपाध्याय ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करेंगे कि कृपया इस पर ध्यान दें कि इन लोगों ने कोई अनुचित काम नहीं किया है। इन लोगों का दागी लोगों से कोई संबंध नहीं है। मुझे लगता है कि यह अब भी संभव हो सकता है।
सत्तारूढ़ टीएमसी ने खारिज किया गंगोपाध्याय का सुझाव
गंगोपाध्याय ने वकील और माकपा सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य समेत कुछ प्रमुख वकीलों के नाम भी सुझाए जो इस कमेटी का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, टीएमसी ने इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद कोई समझौता नहीं: कल्याण बनर्जी
पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कोई समझौता नहीं हो सकता। अब सिर्फ कोर्ट के आदेश का पालन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि गंगोपाध्याय एक दिन सीएम के इस्तीफे की मांग करते हैं और अगले दिन समिति बनाने की सलाह देते हैं। ये सब राजनीतिक लाभ के लिए कहा जा रहा है।