सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल से बाहर हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त जगह खोजने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट अभी नैनीताल में है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की थी याचिका
दरअसल नैनीताल हाईकोर्ट ने 8 मई को उत्तराखंड सरकार को आदेश दिया था कि उच्च न्यायालय को स्थानांतरित के लिए उपयुक्त जगह तलाशी जाए। अदालत ने राज्य सरकार को इस बारे में 7 जून तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई थी।
राज्य सरकार को नोटिस जारी
इस याचिका पर न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को अब गर्मी की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा था?
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आदेश में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट की स्थापना के लिए जमीन तलाशने का आदेश दिया था। इसके साथ ही न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों के आवास, अदालत कक्ष और करीब 7000 वकीलों के लिए चैंबर आदि के लिए उपयुक्त भूमि का पता लगाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि मुख्य सचिव को एक महीने के अंदर यह काम करना होगा और 7 जून तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
मणिपुर मामला: आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में विस्थापित लोगों की संपत्तियों की सुरक्षा पर उसके आदेश का पालन न करने पर अवमानना कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह भावनाओं के आधार पर नहीं चल सकती, उसे कानून के अनुसार काम करना होगा। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की अवकाश पीठ ने कहा कि वह इस तर्क से संतुष्ट नहीं है कि मणिपुर के मुख्य सचिव समेत प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना का मामला बनता है। याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय का सहारा ले सकते हैं। मणिपुर की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है। राज्य सरकार और केंद्र जनता की चिंताओं को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। भाटी ने कहा, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मामले को गरम बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
टीएमसी के खिलाफ विज्ञापन पर रोक के खिलाफ भाजपा शीर्ष अदालत पहुंची
भारतीय जनता पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें मौजूदा लोकसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी को निशाना बनाने वाले विज्ञापन प्रकाशित करने से रोक दिया गया था। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील सौरभ मिश्रा ने याचिका का उल्लेख करते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।