अयोध्या में रामलला के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की गुहार संबंधी भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मुख्य मामले (विवादित स्थल) के साथ सुनने का निर्णय लिया है।
न्यायमूर्ति वी गोपाल गौड़ा और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस याचिका को मुख्य मामले के साथ सुना जाना चाहिए। स्वामी यह दोहराते रहे कि उनकी याचिका पर सुनवाई की जाए। स्वामी ने कहा कि यह रामलला के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़ा मसला है। इसका मुख्य मामले (अयोध्या विवाद) से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जूते-चप्पल को रखने की व्यवस्था नहीं है। उन्हें कपड़ों के अंदर चप्पल रखना पड़ता है। उनके लिए पेयजल की सुविधा नहीं है। पार्किंग की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में इस मसले को मुख्य मामले से अलग कर दिया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका विवादित जगह से कोई लेना-देना नहीं है।
स्वामी के लगातार गुहार के बावजूद पीठ ने कहा कि इस याचिका को मुख्य मामले के साथ ही सुना जाना चाहिए। हालांकि पीठ ने स्वामी से कहा कि वह चाहे तो चीफ जस्टिस के समक्ष अपनी याचिका का उल्लेख कर सकते हैं। स्वामी ने बताया कि वह चीफ जस्टिस के समक्ष अब इस मामले का उल्लेख करेंगे।