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SC News: अजय मिश्र टेनी की अर्जी खारिज, गर्भपात से पहले परीक्षण से जुड़ी एक अन्य याचिका पर होगी सुनवाई

Wed, 26 Oct 2022 11:28 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिवक्ता पटेल ने कहा कि याचिका दायर किए जाने और संशोधन किए जाने के बाद से बहुत वक्त बीत चुका है लेकिन एक पहलू पर अभी भी विचार करना होगा।
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supreme court - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें 22 साल के युवक की हत्या के मामले में उनकी बरी किए जाने को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की अपील को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से इलाहाबाद बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने मिश्रा से उच्च न्यायालय के समक्ष अनुरोध करने के लिए कहा। पीठ ने अपने आदेश में कहा, यदि वरिष्ठ वकील लखनऊ आने में असमर्थ हैं, तो उक्त वकील को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश करने की अनुमति देने के अनुरोध पर उच्च न्यायालय द्वारा विचार किया जा सकता है। 

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मिश्रा ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसने सरकार की अपील को लखनऊ पीठ से इलाहाबाद पीठ को स्थानांतरित करने के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया था। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने इस आधार पर स्थानांतरण की मांग की थी कि उनका प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील आम तौर पर इलाहाबाद में रहते थे और उनकी वृद्धावस्था के कारण, उनके लिए दलील देने के लिए लखनऊ जाना संभव नहीं होगा।

आयु प्रतिबंध की वैधता की जांच करने के लिए सहमत
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट पूर्व-गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान परीक्षण करने के लिए महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर 35 वर्ष की आयु प्रतिबंध की वैधता की जांच करने के लिए सहमत हो गया है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने 17 अक्टूबर को केवल आयु प्रतिबंध से संबंधित पहलुओं पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा, जारी नोटिस उपरोक्त पहलू तक ही सीमित है। अदालत याचिकाकर्ता मीरा करुणा पटेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो एक वकील भी हैं।
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अधिवक्ता पटेल ने कहा कि याचिका दायर किए जाने और संशोधन किए जाने के बाद से बहुत वक्त बीत चुका है लेकिन एक पहलू पर अभी भी विचार करना होगा। उन्होंने पूर्व गर्भधारण और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 की धारा 4 (3) (i) का हवाला देते हुए कहा कि 35 वर्ष की आयु प्रतिबंध महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर प्रतिबंध है। इस धारा के अनुसार, किसी भी प्रसव पूर्व निदान तकनीक का उपयोग या संचालन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि व्यक्ति इस शर्त के लिए योग्य न हो कि गर्भवती महिला की आयु पैंतीस वर्ष से अधिक है।

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