सरकार ने छेड़छाड़ के मामलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के चिकित्सकीय परीक्षण के 20 साल पुराने कानूनी प्रावधान को खत्म कर दिया है।
नए कानून के तहत अश्लील इशारे करने, शीलभंग करने और पीछा करने जैसे कृत्य में पीड़ित महिला की चिकित्सकीय जांच की जरूरत नहीं होगी।
सरकार ने इसी साल 26 जनवरी को नए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम, 2015 का नोटिफिकेशन जारी किया था।