अब फिर से किसी भी दलित की तरफ से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) कानून के तहत शिकायत किए जाने पर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने वाले संशोधन बिल को लोकसभा के बाद बृहस्पतिवार को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। हालांकि अब भी संशोधन विधेयक को कम से कम 15 राज्यों की विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी। उसके बाद ही राष्ट्रपति इसे कानून के तौर पर मंजूर करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को एससी/एसटी कानून के गलत इस्तेमाल का हवाला देते हुए शिकायत मिलने पर आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करने के प्रावधान पर रोक लगा दी थी। अदालत ने इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे देश में दलितों ने सड़कों पर उतरकर हिंसक आंदोलन किया था।
दलित नेताओं और एनडीए के दलित सहयोगियों के जबरदस्त दबाव तथा आगामी चुनावों में दलित समर्थन के गुणा-भाग को ध्यान में रखकर सरकार की तरफ से संशोधन विधेयक लाने का फैसला किया गया था। इस संशोधन विधेयक में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हटाए गए सभी पुराने प्रावधानों को शामिल किया गया है। बता दें कि एससी/एसटी कानून को वर्ष 1989 में दलितों के प्रति भेदभाव व अत्याचार रोकने के मकसद से लाया गया था। इसके तहत शिकायत को गैर जमानती अपराध माना जाता है।