अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए हालिया आदेश को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की है। पुनर्विचार याचिका में केंद्र सरकार ने कहा है कि नए आदेश का व्यापक असर पड़ेगा।
सरकार ने इससे एससी-एसटी एक्ट कमजोर होने की बात कहते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की गुहार की है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सवाल उठाया कि इस मामले में कोई निर्णय देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को औपचारिक तौर पर पार्टी क्यों नहीं बनाया?
उधर, सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
ये याचिका ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एससी-एसटी नामक संगठन की ओर से दायर की गई थी। संगठन का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में हिंसा हो रही है, लिहाजा याचिका पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए। लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया।
इससे पहले पुनर्विचार याचिका में सरकार ने कहा कि अदालत का हालिया आदेश एससी व एसटी समुदाय के लोगों के मौलिक अधिकार के विपरीत है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई ओपन कोर्ट में होनी चाहिए और सरकार को मौखिक पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। मालूम हो कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई आमतौर पर जज चैंबर में होती है।