उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) छात्र और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी कार्यकर्ता शरजील इमाम की याचिका पर दिल्ली सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। जिसमें उसके खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने और देश विरोधी नारे लगाने को लेकर कई एफआईआर दर्ज हैं।
अशोक भूषण और संजीन खन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई की। उन्होंने 10 दिन के अंदर इमाम की याचिका पर दिल्ली सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। इमाम की तरफ से अदालत में वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने कहा कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में दिए दो भाषणों के संबंध में उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में पांच एफआईआर दर्ज हैं।
पीठ ने कहा कि यदि पुलिस के संज्ञान में कोई आपराधिक मामला आता है तो पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में कुछ भी गलत नहीं है। दवे ने वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी के मामले में शीर्ष अदालत के हालिया आदेश का हवाला दिया जिसमें अदालत ने एक को छोड़कर उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को भी इसी तरह की राहत दी जा सकती है।
दवे ने कहा कि इमाम के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में देशद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज है। उन्होंने कहा कि हाल ही में दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है। पीठ ने दवे को दिल्ली सरकार के स्थायी वकील की याचिका की प्रति जमा करने को कहा। अब 10 दिन बाद मामले पर सुनवाई होगी।
इमाम ने अपनी याचिका में पांच राज्यों में दर्ज एफआईआर को क्लब (एक साथ) करने और सभी को दिल्ली हस्तांतरित करके एक ही एजेंसी द्वारा जांच किए जाने की मांग की है। शरजील को 28 जनवरी को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बिहार के जहानाबाद से जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था।