सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से उस याचिका का जवाब देने को कहा है जिसमें मुंबई स्थित आदर्श को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के बैंक खातों पर लगी रोक हटाने की मांग की गई है। 2010 में आदर्श घोटाले की जांच के दौरान इन खातों पर रोक लगा दी गई थी।
जस्टिस जे चेलमेश्वर और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने मंगलवार को केंद्रीय जांच एजेंसी से दो सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा है। हाउसिंग सोसाइटी की ओर से कोर्ट में पेश हुई वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोरा ने खातों से रोक हटाने की मांग की।
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उनकी दलील है कि इमारत की देखरेख के लिए पैसों की आवश्यकता है। उनका कहना था ये खाते को-ऑपरेटिव सोसाइटी के हैं और उनका आदर्श घोटाले से कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने बताया कि बंबई हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी है कि आपराधिक मामले का ट्रायल पूरा होने तक खातों पर रोक जारी रहेगी।
इस घोटाले के सामने आने के बाद महाराष्ट्र में बड़ा सियासी तूफान आ गया था और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था। 31 मंजिला आदर्श अपार्टमेंट दक्षिण मुंबई के कोलाबा में एक पॉश इलाके में बना है। इसे 1999 के कारगिल युद्ध के हीरों और शहीदों के परिवार के लिए बनाया गया था।