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मिलावटी दूध : सिर्फ कानून बनाएं  नहीं उसे लागू भी कराएं 

Wed, 04 May 2016 02:32 AM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • दूध में मिलावट करने वाले पर कार्रवाई ही समाधान
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि मौजूदा छह महीने की सजा का प्रावधान ही पर्याप्त है अगर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Reuters
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मिलावटी दूध से तब ही निजात मिल पाएगी अगर इसके खिलाफ कार्रवाई होगी। सिर्फ सजा के प्रावधान को सख्त बनाने से काम नहीं चलेगा। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में मिलावटी दूध का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है।
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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अनुराग तोमर से कहा, ‘आप कह रहे हैं कि दूध में मिलावट करने वालों को उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए। लेकिन हम कह रहे हैं कि मौजूदा छह महीने की सजा का प्रावधान ही पर्याप्त है अगर दोषियों को पकड़ा जाए और उस पर तत्काल कार्रवाई हो।’

पीठ ने  कहा कि अगर दोषी को पकड़ा नहीं जाता या उसपर मुकदमा नहीं चलाया जाता तो हम क्या कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि यह कानून को लागू करने का मामला है। पीठ ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि मिलावट नहीं हो रही है। यह बड़े पैमाने पर हो रही है लेकिन हम क्या करें? क्या हम यूरिया की बिक्री बंद कर दें? पीठ ने कहा कि अगर केंद्र सरकार के पास इसे लेकर कोई योजना है तो हमें उसका इंतजार करना चाहिए। वहीं केंद्र सरकार ने बताया कि एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है जो इस पर विचार कर रही है कि क्या दूध में मिलावट करने वालों के लिए उम्रकैद का प्रावधान किया जाना चाहिए या नहीं? समिति का गठन खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन सुझाने के लिए किया गया है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पूर्व में दायर हलफनामे में कहा गया था समिति गौर करेगी कि सजा के प्रावधानों को किस तरीके से सख्त बनाया जाए, जिससे इस गोरखधंधे पर रोक लग सके। हलफनामे में कहा गया था कि गत 16 दिसंबर को समिति का गठन किया गया है। 9 जनवरी को समिति की पहली बैठक हुई थी। समिति को 45 दिनों के भीतर यह सुझाव पेश करने के लिए कहा गया है कि क्या खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में संशोधन की जरूरत है या नहीं। हालिया कानून में मिलावटी दूध की बिक्री करने वाले पर छह महीने कैद की सजा का प्रावधान है। शीर्ष अदालत स्वामी अच्युतानंद तीरथ द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। 
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दूध में मिलावट पर सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम

लैब में दूूध जांच - फोटो : demo pics
दूध में डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज, सफेद पेंट और रिफाइंड तेल आदि की मिलावट की जाती है। कई मामले में यूरिया, डिटर्जेंट और ग्लूकोज आदि की मदद से कृत्रिम दूध बनाने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे दूध के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।

16 मार्च, 2016 को केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री हर्षवर्धन ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में 68 प्रतिशत से अधिक दूध भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मानकों पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने बताया कि दूध में मिलावट रोकने के लिए एक ऐसा स्कैनर तैयार किया गया है जो 40 सेकेंड में दूध में मिलावट की अशुद्धियों का पता लगा लेता है।

4 फरवरी, 2015 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया कि मिलावटी दूध की बिक्री को रोकने के लिए 16 दिसंबर 2014 को एक समिति का गठन किया गया है। समिति गौर करेगी कि सजा के प्रावधानों को किस तरीके से सख्त बनाया जाए, ताकि इस गोरखधंधे पर रोक लगाई जा सके। 
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