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आदर्श सोसायटी को अपने कब्जे में ले केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

Sat, 23 Jul 2016 12:41 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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मुंबई की आदर्श सोसायटी ढहाने की कार्रवाई फिलहाल टल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लंबित अपील के निपटारे तक इसे नहीं ढहाया जाएगा। राजनीतिक भ्रष्टाचार का पर्याय मानी जाने वाली आदर्श सोसायटी को अवैध बताते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने इसे ढहाने का आदेश दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दक्षिण मुंबई के कोलाबा में बने इस 31 मंजिला अपार्टमेंट पर 5 अगस्त तक अपने कब्जे में रखने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को इस सोसायटी का प्रबंधन भी अपने हाथ में लेने के लिए कहा है। पीठ ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कोई भी व्यक्ति आदर्श सोसायटी के भीतर दाखिल न हो सके। इस पर सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि आदर्श हाउसिंग सोसायटी सैन्य भूमि पर है, लिहाजा इस पर मिलिट्री एस्टेट के निदेशक या उनका कोई प्रतिनिधि ही उस जमीन को अपने हाथों में लेगा।

पीठ ने मुंबई हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को या तो खुद या किसी अन्य रजिस्ट्रार को इस पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए कहा है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने यह सुनिश्चित किया कि अपील के निपटारे तक आदर्श सोसायटी को नहीं ढहाया जाएगा। साथ ही पीठ ने मुंबई  हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सभी अंशधारकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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मालूम हो कि गत अप्रैल में बांबे हाईकोर्ट ने 31 मंजिला आदर्श हाउसिंग सोसायटी को पूरी तरह अवैध बताते हुए ढहाने का आदेश दिया था। वास्तव में युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं के लिए यह सोसायटी बननी थी लेकिन मुंबई के पॉश इलाके में बनने वाले इस सोसायटी में कुछ नेताओं और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी फ्लैट बुक करवा लिए। आदर्श सोसायटी के फ्लैटों का बाजार भाव करीब पांच से सात करोड़ रुपये है।
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31 मंजिला घोटाले तक फैल गई आदर्श सोसायटी

आदर्श सोसायटी - फोटो : bbc
मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसायटी बनाई गई थी। इसे इस आधार पर अनुमति दी गई थी कि इसमें युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और युद्घ नायकों को मकान दिए जाएंगे। इसमें केवल छह मंजिला इमारत बनाई जानी थी जबकि बना दिया गया 31 मंजिला। यह इमारत कोलाबा के नौसैनिक क्षेत्र में 6,450 वर्ग मीटर के भूखंड पर बनी है।

सोसायटी बनने के कुछ सालों के बाद एक आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि तमाम नियमों को ताक पर रख कर सोसायटी के फ्लैट नौकरशाहों, राजनेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेचे गए। घोटाले का पर्दाफाश 2010 में हुआ। तब इस मामले में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।

मामले की जांच के लिए 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया। इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जेए पाटील ने की। दो साल तक इस समिति ने 182 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की और अप्रैल 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। भूमि घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है।
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