सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह मुस्लिमों में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा के सिर्फ कानूनी पहलू पर ही विचार करेगा। मुस्लिम शरिया के तहत तलाक पर अदालतों की निगरानी की जरूरत है या नहीं, इस बारे में शीर्ष अदालत विचार नहीं करेगी क्योंकि यह वैधानिक मामला है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेएस खेहर, न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘आप सभी पक्षों के वकील एक साथ बैठकर तय कर लें कि शीर्ष अदालत में इन मसलों को कैसे पेश किया जाए। इन मुद्दों पर फैसले के लिए हम 16 फरवरी की तारीख मुकर्रर कर रहे हैं।’ पीठ ने सभी संबंधित पक्षों से स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी खास मामले के तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार नहीं करेगी और इसके बजाय सिर्फ कानूनी मसले पर फैसला देगी।
पीठ ने कहा, ‘हम इसके तथ्यों में नहीं जाना चाहते। हम सिर्फ कानूनी पहलू पर ही विचार करने में दिलचस्पी रखते हैं।’