सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता पद के लिए आवेदनों का आकलन करते समय हाई कोर्ट को 10-20 साल से प्रैक्टिस कर रहे वकीलों को सीधे 10 अंक देने के बजाय हर साल के लिए एक अंक आवंटित करना चाहिए। जस्टिस यूयू ललित, एस रवींद्र भट और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि हम मानते हैं कि प्रैक्टिस में 10-20 साल देने वाले वकीलों को सीधे 10 अंक देने के बजाय 10-20 वर्षों के प्रैक्टिस के दौरान हर साल के लिए एक-एक अंक दिया जाए।
शीर्ष अदालत का स्पष्टीकरण वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह द्वारा कुछ उच्च न्यायालयों द्वारा एक मानदंड के रूप में मनमाना और भेदभावपूर्ण गुप्त मतदान का उपयोग करने वाले वकीलों को वरिष्ठ पदनाम प्रदान करने से संबंधित याचिका पर आया।
जयसिंह ने कहा कि कई उच्च न्यायालय 10-20 वर्षों के प्रैक्टिस के लिए 10 अंक देने के नियम का पालन करते हैं। उन्हें वकीलों से पता चला है कि 10-19 वर्षों का अनुभव रखने वाले सभी वकीलों को समान अंक मिल रहे हैं। जयसिंह ने सुझाव दिया कि 10 वर्ष के अनुभव के लिए 10 अंक दिए जा सकते हैं और फिर सेवा के हर अतिरिक्त वर्ष में उन्हें एक अंक दिया जा सकता है।