सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिमों के 'तीन तलाक' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
पश्चिम बंगाल की एक मुस्लिम महिला ने अपनी याचिका में तीन तलाक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कोर्ट से पूछा है कि क्या एकतरफा दिए गए तलाक से किसी मुस्लिम महिला को उसके ससुराल में रहने और उसके बच्चों की परवरिश का अधिकार है या नहीं?
पश्चिम बंगाल की इशरत जहां ने अपनी याचिका में कोर्ट से 'तीन तलाक' की संवैधानिक वैधता को खत्म करने की मांग की है।
इशरत ने कहा की संविधान का आर्टिकल 21 सभी नागरिकों को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। एकतरफा तलाक मस्लिम महिलाओं के ऐसे ही अधिकारों का हनन करता है।
इशरत ने बताया कि उनके पति ने फोन पर उन्हें तलाक दिया जिसके ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया। उन्होंने कहा की ससुराल में उनकी जान को खतरा है।
इशरत ने बताया कि ससुराल वालों ने उन्हें बच्चों से भी अलग कर दिया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा की मेरे पास कोई सहारा नहीं है।
'मैं यहां अपनी बहन के घर में रह रही हूं मेरे माता-पिता भी बिहार में रहते हैं। कोर्ट ने इस मामले में स्वत: सज्ञान लेते हुए मुस्लिम महिलाओं पर तीन तलाक के प्रभावों की जांच के आदेश दिए हैं और इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी तीन तलाक की संवैधानिक वैधता को चुनौति याचिका के दौरान हुई बहस का समर्थन किया था।'