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SC: नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोप में घिरे पूर्व जज की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- यह चौंकाने वाला मामला

Wed, 11 Jun 2025 06:07 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

SC: सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग बेटी के यौन शोषण के मामले में एक पूर्व न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया और इसे ‘हैरान करने वाला’ मामला बताया। पूर्व जज ने दलील दी थी कि पत्नी से वैवाहिक विवाद के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक पूर्व न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिस पर अपनी नाबालिग बेटी का योन शोषण करने का आरोप है। शीर्ष कोर्ट ने इसे 'हैरान करने वाला' बताया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने पूछा, बेटी आरोप लगा रही है। यह चौंकाने वाला है। वह एक न्यायिक अधिकारी हैं और यह दुराचार का गंभीर आरोप है। यह हैरान करने वाला है। बेटी ने आरोप लगाया है। उसे जीवनभर के लिए आघात पहुंचा होगा। यह मामला कैसे रद्द हो सकता है?

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सुप्रीम कोर्ट ने बंबई हाई कोर्ट के उस आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने को सही ठहराया गया था। हाई कोर्ट का यह आदेश 15 अप्रैल 2025 को आया था। बेंच इस दलील पर सहमत नहीं हुई कि पूर्व जज की पत्नी लंबे समय से उनसे अलग रह रही हैं और वैवाहिक विवाद के कारण उन्हें फंसाया गया है और शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से कथित रूप से परेशान किए जाने के बाद उनके पिता ने आत्महत्या की थी, जिसके बाद यह मामला सामने आया। 

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जस्टिस मनमोहन ने टिप्पणी की, हम इस सब में नहीं पड़ना चाहते। आत्महत्या बेटे (पूर्व जज) के कृत्यों के कारण हो सकती है। पूर्व जज के वकील ने कहा, इस व्यक्ति का पूरा जीवन बर्बाद हो गया। सब कुछ वैवाहिक विवाद से शुरू हुआ। उनके पिता ने आत्महत्या की। शिकायत काफी समय बाद दर्ज की गई और पहले किसी कानूनी प्रक्रिया में इस बारे में कोई बात नहीं की गई थी। हालांकि, बेंच ने गौर किया कि आरोप बेहद गंभीर हैं और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज है। इस आधार पर बेंच ने उनके खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया। 

यह मामला महाराष्ट्र के भंडारा जिले में 21 जनवरी 2019 को दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप है कि यौन शोषण की घटनाएं मई 2014 से 2018 के बीच हुई थीं। अदालत में यह रिकॉर्ड पर आया कि इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, लेकिन औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं हुए हैं। पूर्व जज पर आईपीसी की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करने) और पॉक्सो कानून की धाराएं 7, 8, 9 (एल), 9 (एन) और 10 के तहत आरोप लगाए गए थे।। ये धाराएं गंभीर और अनाचारपूर्ण दुर्व्यवहार सहित विभिन्न प्रकार के यौन उत्पीड़न से जुड़ी हैं।  
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याचिका में दावा किया गया था कि शिकायत दुर्भावना से प्रेरित है और प्राथमिकी चार साल बाद दर्ज की गई, जब बच्चे की हिरासत और वैवाहिक विवाद अदालत में लंबित था। साथ ही कहा गया कि पॉक्सो कानून के तहत जो धाराएं लगाई गई हैं, उसके लिए जरूरी तथ्यों की पुष्टि नहीं हुई है।

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