सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन की उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नौ मई के आदेश को चुनौती दी थी।
नौ मई को संविधान पीठ ने जस्टिस कर्णन को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने कैद की सजा सुनाई थी। इन सबके बीच, जस्टिस कर्णन ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने 12 मई को दिए अपने आदेश में कहा, ‘गंभीरता से विचार करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जस्टिस कर्णन ने जो अवमानना की है वह बेहद गंभीर है। यह अंतिम निर्णय है। ऐसे में जस्टिस कर्णन की याचिका विचार योग्य नहीं है।’
रजिस्ट्री ने जस्टिस कर्णन सहित अन्य लोगों की उन याचिकाओं को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिनमें न्यायालय की अवमानना अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस कर्णन का कहना था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही नहीं हो सकती। साथ ही उन्होंने कहा था कि आठ फरवरी को अवमानना नोटिस के साथ-साथ उनके खिलाफ की गई अवमानना की कार्यवाही असंवैधानिक और गलत है। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही के