सुप्रीम कोर्ट ने विशाखापत्तनम गैस लीक मामले में एनजीटी द्वारा दिए गए आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने एलजी पॉलीमर कंपनी को 50 करोड़ रुपये जमा करने और मामले की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन करने का आदेश दिया था।
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जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एनजीटी के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता कंपनी को एनजीटी के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि सात मई को यह घटना हुई थी। इस घटना के बाद अब तक इस मामले को लेकर सात अलग-अलग कमेटी का गठन किया जा चुका है। कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि आखिर एक ही घटना की जांच को लेकर कितनी कमेटियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने दायित्व से पीछे नहीं हट रही है।
मालूम हो कि एनजीटी ने इस घटना के अगले ही दिन 8 मई को स्वत संज्ञान लिया था और कंपनी को 50 करोड़ रुपये जमा करने के अलावा मामले की तह तक जाने के लिए पूर्व जस्टिस बीएस रेड्डी की अध्यक्षता में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन का निर्णय लिया था।
इस बीच विशाखापत्तनम में स्थानीय लोगों ने गैस लीक मामले को विरोध प्रदर्शन किया। लॉकडाउन के बीच सैकड़ों लोग सड़क पर इकट्ठा हो गए। उनकी मांग थी कि गांव में प्रत्येक परिवार से एक—एक व्यक्ति को नौकरी दी जाए।