सार
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई कि वह MCOCA जैसे विशेष कानूनों के मामलों के लिए अदालतें क्यों नहीं बना रही है। भिवंडी कांग्रेस पार्षद मनोज मातरे की 2017 में हुई हत्या के मामले में मुख्य आरोपी प्रशांत मातरे आठ साल से जेल में है। कोर्ट ने केस की सुनवाई जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि जब आप विशेष कानून बना रहे हैं तो उनके लिए विशेष अदालतें और ढांचा क्यों नहीं बना रहे। कोर्ट ने 2017 में भिवंडी के कांग्रेस पार्षद मनोज मातरे की हत्या से जुड़े केस में सुनवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि अगर सुनवाई समय पर पूरी नहीं होती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील से पूछा कि राज्य में अब तक महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसे कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें क्यों नहीं बनाई गईं। कोर्ट ने कहा कि अगर आप स्पेशल स्टैच्यूट बना रहे हैं, तो स्पेशल ट्रायल का ढांचा भी बनाना होगा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जेल में बंद गैंगस्टर्स को कार्रवाई से क्यों बचाया जा रहा है।
भिवंडी हत्या मामले में आठ साल से जेल में आरोपी
यह मामला 2017 में भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के तीन बार पार्षद रहे कांग्रेस नेता मनोज मातरे की हत्या से जुड़ा है। हत्या के मामले में मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे प्रशांत भास्कर मातरे पिछले आठ वर्षों से जेल में हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस और ट्रायल कोर्ट से सवाल किए।
सुप्रीम कोर्ट ने तय की सुनवाई की डेडलाइन
कोर्ट ने आदेश दिया कि इस केस की सुनवाई जनवरी 2026 तक पूरी की जाए। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए गए हैं कि वह हर महीने दो बार इस केस की सुनवाई करे। कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकीलों को भी निर्देश दिया कि वे सहयोग करें और बिना कारण के स्थगन की मांग न करें।
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गवाहों की संख्या पर भी जताई चिंता
कोर्ट ने मामले में 200 गवाहों की लंबी सूची पर भी चिंता जताई और महाराष्ट्र पुलिस से कहा कि वह केवल अहम गवाहों की पहचान कर उन्हें ही कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि आजकल लोग सच के लिए खड़े नहीं होते, इसलिए बहुत से गवाह मुकर जाते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
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अब तक क्या हुआ है इस केस में
एफआईआर के मुताबिक, 14 फरवरी 2017 को कांग्रेस पार्षद मनोज मातरे पर दिनदहाड़े चॉपर और हथियारों से हमला किया गया था। पुलिस ने इस मामले में प्रशांत भास्कर मातरे सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपी को मुख्य साजिशकर्ता साबित करते हैं।