राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर दिए कथित बयान और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर राहुल गांधी की याचिक पर सुनवाई करते हुई सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि व्यक्तिगत आपराधिक मानहानी केस की जांच के लिए पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। इस मामले में अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने इस मामले में पुलिस को मानहानी का रिपोर्ट दर्ज करने को कहा था, न कि जांच के सबूत खुद देने के लिए। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की कार्यवाही पर भी सवाल उठाया। इस मामले में पुलिस का क्या रोल है?
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से कहा था कि वे आरएसएस को महात्मा गांधी का हत्यारा बताने के मामले में माफी मांगें या फिर मानहानि के केस में ट्रायल के लिए तैयार रहें। कोर्ट ने कहा कि 'नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को मारा' और 'आरएसएस के लोगों ने महात्मा गांधी को मारा', इन दोनों बातों में बहुत फर्क है। वहीं, कांग्रेस ने कहा था कि राहुल माफी नहीं मांगेंगे। इसकी बजाय वे इतिहास से जुड़े फैक्ट्स और सबूत पेश करेंगे।
राहुल ने यह बयान 6 मार्च 2014 को मुंबई के भिवंडी के सोनाले इलाके में एक रैली में दिया था। इसके बाद आरएसएस की एक शाखा के सेक्रेटरी राजेश कुंटे ने राहुल के खिलाफ भिवंडी के लोकल कोर्ट में आपराधिक केस दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि इससे आरएसएस की छवि खराब हुई है। राहुल ने मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर यह केस खारिज करने की मांग की थी।