झारखंड सरकार को राहत देते हुए कोर्ट ने बिजली कटौती को न्यूनतम स्तर पर रखने और जुलूस के मार्गों तक ही सीमित रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से नियोजित बिजली कटौती के दौरान अस्पतालों को आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के प्रमुख को उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि अस्पतालों को आपातकालीन आपूर्ति जारी रखी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को रामनवमी के दौरान बिजली की आपूर्ति में कटौती करने की अनुमति दे दी है। कटौती की मांग जुलूस के दौरान बिजली के झटकों (करंट लगने की घटनाओं) से बचने के लिए की गई थी। कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को संशोधित किया, जिसमें राज्य के अधिकारियों को धार्मिक जुलूसों के दौरान बिजली की आपूर्ति में कटौती करने से रोका गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से बिजली कटौती को न्यूनतम स्तर पर रखने और धार्मिक जुलूसों के मार्गों तक ही सीमित रखने को कहा।
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कोर्ट ने सरकार से रामनवमी के दौरान नियोजित बिजली कटौती के दौरान अस्पतालों को आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रमुख से हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने कर यह बताने को कहा कि बिजली कटौती न्यूनतम अवधि के लिए ही होगी।
क्या है मामला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड सरकार और उसकी बिजली वितरण कंपनी को रामनवमी जुलूस के मार्गों पर बिजली की आपूर्ति में कटौती करने की अनुमति दे दी, ताकि करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने झामुमो के नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन की सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया। उन्होंने दलील दी कि बिजली के झटकों से बचने के लिए बिजली की कटौती की प्रथा दो दशकों से अधिक समय से चल रही है। ऐसे जुलूसों में लोग आमतौर पर लंबे झंडे लेकर चलते हैं। इससे राज्य में करंट लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो सकती हैं। भगवान राम का जन्मोत्सव रामनवमी 6 अप्रैल को है।