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आखिर क्यों बिना परीक्षा प्रमोट नहीं होंगे अंतिम वर्ष के छात्र, जानें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

Sat, 29 Aug 2020 10:39 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कॉलेज के अंतिम वर्ष/सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के छह जुलाई को जारी किए गए दिशानिर्देशों को बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर से पहले अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाएं करानी होंगी। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो परीक्षा टाल सकती है लेकिन आखिरी फैसला यूजीसी का होगा। बिना परीक्षा पास किए छात्रों को प्रमोट नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद भी छात्रों के बीच भ्रम बना हुआ है। ऐसे में हम आपको इसकी विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

  • अपनी दलील में छात्रों और टीचर एसोसिएशन का कहना था कि कोरोना महामारी के मद्देनजर छात्रों की परीक्षा लेना उनकी जान को जोखिम में डालेगा। यूजीसी ने अपने दिशानिर्देशों में स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया है। 
  • छात्रों का कहना था कि लॉकडाउन के कारण कक्षाएं नहीं हुई हैं। ऐसे में बिना आवश्यक संख्या में कक्षाएं हुए परीक्षा लेना मनमाना और अतार्किक फैसला है।
  • वहीं यूजीसी का कहना था कि देश में जब भी उच्च शिक्षा की बात आएगी तो उसके कहे शब्द ही अंतिम होंगे। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उसके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता है।
  • इन दलीलों को सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास परीक्षाएं स्थगित करने का अधिकार है लेकिन परीक्षा को रद्द करके छात्रों को प्रमोट करने का अधिकार नहीं है। 
  • अदालत ने कहा कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 30 सितंबर की समयसीमा को बढ़ाने के लिए यूजीसी से बात कर सकते हैं। लेकिन आखिरी फैसला यूजीसी का ही होगा कि वह समयसीमा को आगे बढ़ाती है या नहीं।

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यूजीसी ने दी है घर से परीक्षा देने की इजाजत
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को ऑफलाइन, ऑनलाइन या ब्लेंडेड मोड में परीक्षाएं कराने की इजाजत दी हुई है। यानी छात्रों को परीक्षा केंद्र जाने की जरूरत नहीं है। हालांकि परीक्षा किस तरह कराई जाएं इसका फैसला विश्वविद्यालय करेगा। यदि विश्वविद्यालय ऑफलाइन या परीक्षा केंद्र पर परीक्षा लेना चाहेगा तो छात्रों को परीक्षा उसी तरह देनी होगी फिर बेशक वे ऑनलाइन परीक्षा की चाहत ही क्यों न रखते हों।

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