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एनईईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई व एमसीआई से मांगा जवाब

Tue, 03 May 2016 11:34 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • आंध्र-प्रदेश और तेलगंना ने भी कहा कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले लेने का अधिकार राज्य सरकार को प्राप्त है
  • सभी को गुरुवार तक इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है
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सुप्रीम कोर्ट
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों द्वारा एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम
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के तहत परीक्षा आयोजित करने की अनुमति देने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया
(एमसीआई) को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। सभी को गुरुवार तक इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। एक मई को शांतिपूर्वक
हुई एनईईटी-एक परीक्षा को देखते हुए  न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नई याचिकाओं पर तत्काल आदेश देने की जरूरत नहीं
है।

पीठ ने कहा कि तमाम स्टेकहोल्डर की दलीलों को सुनने के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। पीठ ने सरकार से अखबार और इंटरनेट के माध्यम से 24
जुलाई को आयोजित होने वाली एनईईटी-दो परीक्षा के बारे में छात्रों और अभिभावकों तक जानकारी पहुंचाई जाए, जिससे कि जो छात्र एक मई की परीक्षा के
लिए आवेदन नहीं भर पाए थे, वे एनईईटी-दो के लिए आवेदन कर सकते। मालूम हो कि एक मई को प्रस्तावित एआईपीएमटी को एनईईटी-एक माना गया था। 
सुनवाई के दौरान जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद-370 के तहत विशेषाधिकार
मिला हुआ है। उन्होंने अनुच्छेद-370 और जम्मू-कश्मीर संविधान के अनुच्छेद-35 ए और खंड-छह का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को अपनी परीक्षा
आयोजित करने का अधिकार है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार इसमें दखल नहीं दे सकता।

एनईईटी में सफल हुए राज्य केबाहर केछात्र उनके यहां दाखिला पाने के हकदार नहीं हैं। साथ ही आंध्र-प्रदेश और तेलगंना ने भी कहा कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले लेने का अधिकार राज्य सरकार को प्राप्त है। हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता राज्यों को याद दिलाया कि एकल प्रवेश परीक्षा (नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट) के तहत चयनित होने वाले 85 फीसदी छात्रों को वे एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।

सुनवाई के दौरान राज्यों की ओर से एनईईटी परीक्षा अंग्रेजी में लिए जाने का विरोध किया गया। दक्षिण भारतीय राज्यों समेत कुछ अन्य राज्यों ने इस पर आपत्ति जताई कि क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित न होने उनके छात्रों को परेशानी होगी। खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को। वहीं एमसीआई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास ने क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा लेने का विरोध करते हुए कहा कि पूरे देश में एमबीबीएस और बीडीएस की परीक्षा अंग्रेजी में होती है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी पाया कि अलग-अलग राज्यों द्वारा अलग - अलग परीक्षा आयोजित करने से छात्रों को परीक्षा देने के लिए यहां से वहां जाना पड़ता है। साथ ही छात्रों को आवेदन करने में अलग-अलग पैसे देने पड़ते हैं। अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
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