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New Parliament: नया संसद भवन बनने का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा परियोजना को दी हरी झंडी

Tue, 05 Jan 2021 01:29 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट के पास नए संसद परिसर के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को परियोजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि परियोजना के लिए जो पर्यावरण मंजूरी दी गई है तथा भूमि उपयोग में परिवर्तन के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है वे वैध हैं।

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न्यायमूर्ति खानविलकर ने खुद की और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की ओर से यह फैसला लिखा जिसमें सेंट्रल विस्टा परियोजना के प्रस्तावक को सभी निर्माण स्थलों पर स्मॉग टॉवर लगाने और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।

पीठ के तीसरे न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भी परियोजना को मंजूरी पर सहमति जताई हालांकि उन्होंने भूमि उपयोग में बदलाव संबंधी फैसले पर और परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दिए जाने पर असहमति जताई।
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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नए संसद की आधारशिला रखी थी। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि जब तक अदालत इसपर कोई निर्णय नहीं देता तब तक कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। परियोजना का शिलान्यास कार्यक्रम 10 दिसंबर को आयोजित हुआ था।

इस परियोजना की घोषणा पिछले साल सितंबर में हुई थी, जिसमें एक नए त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है। इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस परियोजना के तहत साझा केंद्रीय सचिवालय 2024 तक बनने का अनुमान है। यह परियोजना लुटियंस दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे दायरे में फैली हुई है।

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न्यायालय के ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ को मंजूरी देने के फैसले का स्वागत करते हैं: पुरी

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को केंद्र की महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ को मंजूरी देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार पर्यावरण संबंधी मुद्दों को लेकर हमेशा संवेदनशील रही है। आवास एवं शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार निर्माण की अवधि के दौरान उच्चतम मानकों का पालन करना जारी रखेगी। पुरी का मंत्रालय ही इस परियोजना पर काम कर रहा है।

पुरी ने ट्वीट किया, 'दिल्ली निश्चित रूप से विश्व स्तर का राजधानी शहर बनने की ओर अग्रसर है और इस दिशा में पहले कदम के तौर पर, 2022 में देश के स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर नया संसद भवन तैयार हो चुका होगा, जो नए भारत की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा।'

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बहुमत से फैसला सुनाते हुए ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ के लिए पर्यावरण मंजूरी और भूमि उपयोग में बदलाव की अधिसूचना को बरकरार रखा। पुरी ने कहा, 'हम माननीय उच्चतम न्यायालय के ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ को मंजूरी देने के फैसले का स्वागत करते हैं। केन्द्र सरकार पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर हमेशा संवेदनशील रही है और इसके निर्माण के दौरान भी उच्च मानकों का पालन किया जाएगा।'

इस परियोजना की घोषणा पिछले वर्ष सितंबर में हुई थी, जिसमें एक नए त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है। इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा।
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