सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि प्राथमिकी रद्द करने के लिए जनहित याचिका कैसे दायर की जा सकती है। यह याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत देश के सभी राज्यों द्वारा ग्रीन पटाखे बेचने, खरीदने या फोड़ने के संबंध में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए दायर की गई है।
पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए एफआईआर को रद्द करने वाली ऐसी कोई राहत नहीं दी जा सकती है। यदि कोई आरोपी उस मामले में व्यथित है, तो वह उच्च न्यायालय या न्यायालय के सामने उचित कार्यवाही शुरू कर सकता है। शीर्ष अदालत संजीव नेवार और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिवाली पर ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने के लिए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि शीर्ष अदालत ने 29 अक्टूबर, 2021 को अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि पटाखों पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति थी।