SC ने बाघों की कथित मौत पर केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से देश में बाघों की कथित मौत के बारे में जानकारी मांगी है। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने बाघों की मौत के बारे में समाचार पत्रों की खबरों पर ध्यान देने के बाद यह जानकारी मांगी है। शीर्ष अदालत 2017 में अधिवक्ता अनुपम त्रिपाठी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें लुप्तप्राय बाघों को बचाने की मांग की गई थी, जिनकी संख्या देश भर में घट रही है।
याचिका में कहा गया था कि बाघ या तो स्थानीय लोगों या अधिकारियों द्वारा ज़हर देकर, वन रक्षकों द्वारा गोली मारकर या अवैध शिकार करके मारे जा रहे हैं।
सीएटी के आदेश पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर विचार करेगी बड़ी पीठ
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की प्रधान पीठ के अध्यक्ष के एक आदेश को चुनौती वाली याचिका पर फैसला लेने के लिए हाईकोर्ट के क्षेत्रीय अधिकारक्षेत्र से जुड़े न्यायिक मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है।
जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने कहा, यह मुद्दा बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करता है और सार्वजनिक महत्व का है। हमें यह उचित लगता है कि इस मामले को बड़ी पीठ विचार करे। पीठ ने कहा, इस मामले को सीजेआई के समक्ष रखा जाए ताकि इस मामले में जल्द से जल्द निर्णय लिया जा सके। यह मामला तब विचार के लिए आया जब सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने सीएटी अध्यक्ष की प्रधानपीठ के एक आदेश को दरकिनार कर दिया था। सीएटी ने भारतीय वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मूल आवेदन को इलाहाबाद बेंच (नैनीताल सर्किट बेंच) से नई दिल्ली की प्रधान पीठ में स्थानांतरित कर दिया था।