सार
तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में वेदांत समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर को बंद करने के तर्कसंगत आदेश में, सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि उद्योग को बंद करना पहली पसंद का मामला नहीं है, बल्कि इकाई के बार-बार गंभीर उल्लंघन की प्रकृति का नतीजा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सतत विकास के सिद्धांत को कायम रखते हुए और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने, साफ पानी पीने व बीमारी से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में वेदांत समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर को बंद करने के तर्कसंगत आदेश में, सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि उद्योग को बंद करना पहली पसंद का मामला नहीं है, बल्कि इकाई के बार-बार गंभीर उल्लंघन की प्रकृति का नतीजा है।
पीठ ने कहा, पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन से न तो वैधानिक अधिकारियों और न ही मद्रास हाईकोर्ट के पास कोई अन्य दृष्टिकोण अपनाने का विकल्प बचता है। पीठ ने 29 फरवरी को प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण मई 2018 से बंद तांबा गलाने वाले संयंत्र को बंद करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ वेदांता लिमिटेड की अपील खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक निर्विवाद और मौलिक सत्य है कि सभी व्यक्तियों को स्वच्छ हवा में सांस लेने, स्वच्छ पानी पीने, रोग और बीमारी से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है।