सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें सिक्कों और करेंसी नोट का इस्तेमाल रोकने तथा देश में कालेधन पर नियंत्रण के लिए उन्हें डिजिटल करेंसी प्रणाली से बदलने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस जे एस खेहर और डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि सरकार कालेधन पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठा रही है और याचिकाकर्ता अपनी शिकायतों के लिए अपने राज्य के हाईकोर्ट के पास जा सकता है।
पीठ ने कहा, ‘सरकार कालेधन के खिलाफ काम कर रही है। अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो अपने राज्य के हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।’ यह याचिका हरिद्वार की न्याय धर्म सभा की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए सिक्कों और करेंसी नोट का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया जाना चाहिए। इसके बदले डिजिटल करेंसी सिस्टम को लाया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि संगठन के संस्थापक ने वित्त मंत्रालय के समक्ष एक प्रजेंटेशन दिया था लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने उनके सुझावों की सराहना की थी लेकिन इस संबंध में कुछ नहीं किया गया।