उच्चतम न्यायालय ने गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिन ओझा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने ओझा से कहा कि उन्हें राहत के लिए गुजरात उच्च न्यायालय ही जाना होगा।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से यतिन ओझा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनीं। पीठ ने कहा कि वह इस पर सुनवाई की इच्छुक नहीं है, क्योंकि इसकी सुनवाई उच्च न्यायालय को ही करनी चाहिए।
उच्च न्यायालय ने ओझा की टिप्पणियों के मद्देनजर इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि बार के नेता ने फेसबुक पर अपनी लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अदालत और उसकी रजिस्ट्री के खिलाफ आरोप लगाए हैं।
सिंघवी का कहना था कि बार अध्यक्ष ने न्यायालय के कामकाज पर नहीं बल्कि रजिस्ट्री के कामकाज पर टिप्पणी की थी और उच्च न्यायालय ने आवेश में यह आदेश पारित किया है।हालांकि, पीठ ने इस याचिका पर विचार नहीं किया और ओझा से कहा कि वह उच्च न्यायालय जाएं। इस पर सिंघवी ने यह याचिका वापस ले ली।
उच्च न्यायालय ने ओझा के कथित बयानों का संज्ञान लेते हुए कहा था कि अपमानजनक टिप्पणियां बगैर किसी ठोस आधार और सच्चाई जानने की मंशा के बगैर ही की गई हैं। यही नहीं, संस्था के मुखिया के रूप मे मुख्य न्यायाधीश से किसी प्रकार की जांच कराने का अनुरोध किए बगैर ऐसा किया गया है।