सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को देश केउन तमाम जिलों में एक विशेष अदालत गठित करने का निर्देश दिया है जहां पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चियों के साथ बलात्कार व यौन शोषण के 100 या उससे अधिक मुकदमे लंबित हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पोक्सो केमामलों की जांच केलिए अलग तरीका अपनाने की जरूरत है क्योंकि इसमें बच्चियां पीड़िता होती है। करूणा व संवेदना से बच्चों केसाथ बर्ताव करने की जरूरत है।
चीप्ऊ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि विशेष अदालतों के गठन केसाथ-साथ बच्चों केअनुकूल माहौल, विशेष अभियोजकों और सपोर्ट स्टाफ को नियुक्त करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि 60 दिनों केभीतर विशेष अदालतों का गठन हो जाना चाहिए। केंद्र सरकार को इसकेलिए फंड उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया है कि इन विशेष अदालतों में सिर्फ पोक्सो के मुकदमे चलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को चार हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने केलिए कहा है। अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।
वृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील वी गिरी ने पीठ को बताया कि दिल्ली की साकेत अदालत में दो पोक्सो कोर्ट है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह सिर्फ दिल्ली की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि मध्य प्रदेश, त्रिपुरा आदि की अदालतों केबारे में बात कर रहे हैं, जहां प्राइवेसी का मतलब कोर्ट में पीड़िता और आरोपी के बीच सिर्फ पर्दा होता है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि हम उन राज्यों की बात कर रहे हैं जहां आधारभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। वहां मजिस्ट्रेट केलिए बामुश्किल कोई कमरा होता है। छोटे से चैंबर में वह बैठते हैं। यह कुछ ऐसे मुद्दे हैंजो न्यायपालिका को प्रभावित कर रहे हैं न कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को। कहीं न कहीं हम ट्रैक से उतर गए हैं।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। वास्तव में कोर्ट ने बच्चियों के बलात्कार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने पाया था कि इस वर्ष एक जनवरी से 30 जून केबीच देश भर में पुलिस ने बच्चियों से बलात्कार के 24212 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से 11981 मामले में छानबीन जारी है। जबकि 12231 मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है। लेकिन महज 6449 मामलों का ट्रायल शुरू हो सका है। अब तक ट्रायल कोर्ट ने महज 911 मामलों का निपटारा किया है। यानी महज चार फीसदी मामले का निपटारा हुआ है। बच्चियों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाओं में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इस दौरान यूपी में 3457 एफआईआर दर्ज की। इनमें से 1779 मामलों में अब तक छानबीन जारी है।
जगरूकता को लेकर सिनेमाघरों में दिखाई जाए क्लिप
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों में फोरेंसिक साइंस लेब्रोटरी सही व प्रभावी तरीकेसे काम करें और वह बिना किसी के देरी केरिपोर्ट भेजे। सुप्रीम कोर्ट ने अमाइकस क्यूरी की रिपोर्ट पर गौर करने केबाद पाया कि इन मामले में छानबीन में देरी होती है और फोरेंसिक रिपोर्ट देरी से आने पर ट्रायल में देरी होती है।
साथ ही कोर्ट ने अमाइकस क्यूरी केउस सुझाव को अमल करने केलिए कहा है कि बच्चों के साथ होने वाले यौन उत्पीडन पर रोकथाम और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों के अभियोजन को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसकेलिए हर सिनेमा हॉल में इससे संबंधित क्लिप दिखाया जाना चाहिए। साथ ही समय-समय पर इस क्लिप का प्रसारण टीवी पर भी होना चाहिए। क्लिप में हेल्पलाइन नंबर भी होना चाहिए। साथ ही स्कूल सहित अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर हेल्पलाइन नंबर को प्रदर्शित किया जाना चाहिए।