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Bail Act: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निरंतर हिरासत के बाद अंत में बरी करना ‘गंभीर अन्याय’, जमानत कानून लाने पर विचार करे केंद्र

Tue, 12 Jul 2022 06:36 AM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि नियम विशेष रूप से मना न करते हों तो जमानत की याचिकाओं पर दो सप्ताह में और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर छह सप्ताह में फैसला लिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी कैदी को निरंतर हिरासत में रखने के बाद आखिरकार बरी करना ‘गंभीर अन्याय’ है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि उसे जमानत के मामलों को सरल बनाने के लिए अलग जमानत कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। देश की जेलों में कैदियों की भीड़ और इनमें भी दो तिहाई से अधिक विचाराधीन कैदी होने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह सिफारिश की है। शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि नियम विशेष रूप से मना न करते हों तो जमानत की याचिकाओं पर दो सप्ताह में और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर छह सप्ताह में फैसला लिया जाना चाहिए। जस्टिस एसके कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने सीबीआई द्वारा पकड़े गए एक व्यक्ति के मामले में फैसला देते हुए यह बात कही है। 

पीठ ने कहा, भारत में आपराधिक मामलों में सजा की दर बेहद कम है। हमें ऐसा प्रतीत होता है कि यह कारक जमानत आवेदनों का निर्णय करते समय अदालत के दिमाग पर नकारात्मक भार डालता है। अदालतें यह सोचती हैं कि दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम होने के कारण, जमानत आवेदनों पर सख्ती से निर्णय लेना होगा। यह कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है। पीठ ने कहा कि हम जमानत याचिकाओं पर विचार करने वक्त यह घालमेल नहीं कर सकते कि  कौन का मामला दंडात्मक प्रकृति का नहीं है और किनका ट्रायल के माध्यम से फैसला संभव है। इसके विपरीत निरंतर हिरासत के बाद अंतत: बरी होना ‘गंभीर अन्याय’ का मामला होगा।
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ब्रिटेन और अमेरिका के कानूनों का हवाला
शीर्ष अदालत ने ब्रिटेन और अमेरिका के विभिन्न राज्यों में प्रचलित विशेष जमानत कानूनों का हवाला दिया जहां ऐसे मामलों से निपटने के लिए जांच एजेंसियों और अदालतों, दोनों के लिए पर्याप्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। 

गिरफ्तारी के उपाय का इस्तेमाल संयम से हो
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सतेंद्र कुमार अंतिल के मामले में दिए अपने फैसले में कई दिशानिर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी एक कठोर उपाय है जिसके कारण स्वतंत्रता के अधिकार में कमी आती है। इसका इस्तेमाल संयम से किया जाना चाहिए। 

जांच अधिकारियों के लिए भी निर्देश
पीठ ने फैसले में जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि उसके अधिकारी और एजेंसी सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत नोटिस देने के लिए बाध्य हैं। इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
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सुप्रीम कोर्ट का रिकॉर्ड, एक दिन में 44 फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 44 फैसले देकर कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इनमें जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 फैसले दिए। वहीं जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने आठ फैसले सुनाए जबकि दिनेश माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पांच फैसले दिए। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के अनुसार संभवत: पहली बार एक दिन में सुप्रीम कोर्ट ने इतनी बड़ी संख्या में फैसले सुनाए। वैसे ग्रीष्मावकाश के बाद पहले कार्यदिवस पर हमेशा से ज्यादा फैसले सुनाए जाते रहे हैं। सोमवार को सुनाए फैसलों में जमानत कानून के अतिरिक्त, उद्योगपति विजय माल्या अवमानना मामला और गैंगस्टर अबू सलेम मामला भी महत्वपूर्ण है।  
 

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