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मस्जिद या तो मंदिर ढहाकर बनी, या मंदिर के अवशेष पर:  रामलला विराजमान   

Wed, 21 Aug 2019 02:06 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अयोध्या मसले पर सुनवाई
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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के आठवें दिन मंगलवार को रामलला विराजमान की ओर से पेश वकील ने पक्ष रखा। वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने एएसआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि खुदाई में मिले अवशेष बताते हैं कि मस्जिद या तो मंदिर ढहाकर बनाई गई या उसके अवशेष पर। वहां एक शिलालेख भी मिला है, जिस पर संस्कृत में 12वीं सदी का अभिलेख है। यहां तक कि मुस्लिम गवाह भी मानते है कि उस स्थल पर हिंदू पूजा करते थे।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष वैद्यनाथन ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट, विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृतांत, ऐतिहासिक किताबों, शिलालेखों और मौखिक साक्ष्यों से साफ है कि विवादित जगह वही जगह है जहां भगवान राम का जन्म हुआ। छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे को ढहाने के दौरान एक शिला (4 फुट गुना 2 फुट) मिली, जिस पर संस्कृत का अभिलेख है। ढांचा ढहाने के वक्त मौजूद पत्रकार ने शिला को गिरते देखा था। 

इस पर राजा गोविंदचंद का नाम अंकित है, जो साकेत मंडल के राजा थे और उनकी राजधानी अयोध्या थी। शिला पर यह भी लिखा है कि यह विष्णु मंदिर में लगी थी। वैद्यनाथन ने कहा कि शिला पुरातत्व विभाग के कब्जे में है और इसके अनुवाद को न तो चुनौती दी गई है, न ही उस पर विवाद है।
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मंदिर के लिए मुस्लिम गवाहों का भी हवाला

वैद्यनाथन ने कहा, एएसआई की रिपोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार किया है। हाईकोर्ट ने पाया था कि खुदाई के वक्त जो चीजें मिलीं वे इस्लामिक ढांचे में नहीं हो सकती। यहां तक कि मुस्लिम गवाह भी मानते हैं कि वह राम जन्मस्थली थी और वहां हिंदू पूजा करने आते थे। मोहम्मद हाशिम ने बयान दिया था कि जिस तरह मुस्लिमों के लिए मक्का है, उसी तरह हिंदुओं के लिए अयोध्या। हसमतुल्ला अंसारी ने कहा था कि रामजन्मभूमि होने के कारण अयोध्या को पवित्र माना जाता है। एक अन्य मुस्लिम गवाह ने कहा था कि जब वह आखिरी बार मस्जिद गए तो पत्थरों पर कई तस्वीरें देखी थी।

मगरमच्छ-कछुये इस्लामी संस्कृति का हिस्सा नहीं

वैद्यनाथन ने दलील दी कि खुदाई के दौरान मगरमच्छ और कछुये के चित्र मिले हैं, जिनका इस्लामी संस्कृति से वास्ता नहीं होता। वैद्यनाथन ने कहा कि धार्मिक यात्रा इन दिनों पिकनिक बन गई है। अमरनाथ या सबरीमाला के लिए लोग सुबह फ्लाइट पकड़ते हैं और शाम को लौट आते हैं। सदियों पहले सरयू नदी पर पुल नहीं था लेकिन लोग राम जन्मभूमि जाते थे। परिक्रमा करते थे। वर्ष भर उत्सव जैसा माहौल रहता था। मामले की सुनवाई बुधवार को भी होगी।
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