सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को हाईकोर्ट के लिए पांच जजों की नियुक्ति की फिर से सिफारिश की है। साथ ही, इनके नाम लौटाए जाने की आलोचना भी की। कॉलेजियम ने कहा, सरकार की आपत्तियों पर विधिवत विचार करने के बाद फिर से भेजे गए प्रस्तावों को लौटाना सही रुख नहीं है।
कॉलेजियम ने यह टिप्पणी दो वकीलों अमितेश बनर्जी और साक्य सेन को कलकत्ता हाईकोर्ट में जज नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश लौटाए जाने पर की है। कॉलेजियम ने तीसरी बार इनकी नियुक्ति को शीघ्र मंजूरी देने के लिए कहा है। इसके अलावा सोमशेखर सुंदरेसन को बॉम्बे हाईकोर्ट, समलैंगिक सौरभ किरपाल को दिल्ली हाईकोर्ट और आर जॉन सत्यन को मद्रास हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश भी दोबारा भेजी है।
कॉलेजियम ने पहली बार जुलाई, 2019 में अमितेश और साक्य के नाम की सिफारिश की थी। हालांकि, केंद्र ने दो साल बाद इनके नामों को वापस भेज दिया। इसके बाद, कॉलेजियम ने सितंबर, 2021 में अमितेश और अक्तूबर, 2021 में साक्य की नियुक्ति के लिए अपनी सिफारिश को दोहराया था।
न्यायपालिका का सम्मान करती है सरकार
केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमारी सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है और लोकतंत्र के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता नितांत आवश्यक है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के साथ आने से ही देश महान बनेगा।
अमितेश-साक्य : खुफिया इनपुट में कुछ नया नहीं
केंद्र का तर्क : अमितेश व साक्य की फाइलों को फिर खुफिया ब्यूरो के इनपुट के साथ वापस किया था। कॉलेजियम ने कहा, न्याय विभाग की ओर से 25 नवंबर, 2022 को लौटाई गई फाइल में खुफिया ब्यूरो के जो इनपुट दिए गए हैं, उनमें कोई नई सामग्री या आधार नहीं है।
सोमशेखर सुंदरेसन : अभिव्यक्ति के कारण नहीं ठहरा सकते अयोग्य
केंद्र का तर्क : केंद्र ने सोशल मीडिया पर सोमशेखर सुंदरेसन के विचारों की अभिव्यक्ति को आधार बनाकर उनका नाम लौटाया था।
- कॉलेजियम ने कहा, सोशल मीडिया पर उनके विचारों का इस्तेमाल यह अनुमान लगाने के लिए नहीं किया जा सकता है कि वह पक्षपाती विचार वाले हैं।
- कॉलेजियम ने कहा, न ही यह इंगित करने के लिए कोई सामग्री है कि किसी राजनीतिक दल के साथ मजबूत वैचारिक झुकाव के साथ उनके संबंध हैं।
सौरभ किरपाल : यौन झुकाव के आधार पर लौटाना उचित नहीं
केंद्र का तर्क : पूर्व सीजेआई जस्टिस बीएन िकरपाल के बेटे सौरभ के यौन झुकाव और उनके पार्टनर के स्विस नागरिक होने के आधार पर नाम लौटा दिया था।
- कॉलेजियम ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यौन झुकाव के आधार पर गरिमा व व्यक्तित्व बनाए रखने का अधिकार है।
- यह मानने का कोई कारण नहीं है कि सौरभ के पार्टनर हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करेंगे, खासकर तब जबकि उनका मूल देश हमारा मित्र राष्ट्र है।
आर जॉन सत्यन : पीएम की आलोचना उचित तर्क नहीं
केंद्र का तर्क : सत्यन का नाम पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना के कारण लौटाया गया।
- कॉलेजियम ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर खुफिया ब्यूरो की आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पीएम की आलोचना जज बनने के लिए अयोग्यता नहीं हो सकती।