अनाथालयों और बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनका डेटाबेस तैयार करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिया कि वे इस साल के अंत तक बच्चों की देखभाल करने वाली सभी संस्थाओं का पंजीकरण करें। पीठ ने पंजीकरण के साथ ही इनमें रहने वाले सभी बच्चों का डेटाबेस बनाने को कहा है। डेटाबेस को हर महीने अपडेट करने का भी निर्देश दिया गया है।
पीठ ने संबंधित प्राधिकरण से डेटाबेस की विश्वसनीयता और गोपनीयता बनाए रखने को कहा है। पीठ ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले सभी बच्चों को देखभाल करने वाली संस्थाओं में ही रखा जाए। पीठ ने कहा कि इनके लिए गोद देने जैसे विकल्प पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वर्ष 2007 में अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर दायर की गई थी। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु के महाबलिपुरम में स्वयंसेवी संगठनों और सरकारी संस्थाओं की ओर से संचालित अनाथालयों में रहने वाले बच्चों का यौन शोषण किया जाता है। याचिका में इसी रिपोर्ट को आधार बनाया गया था।