पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के एक संभावित उम्मीदवार को बड़ी राहत देते हुए वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाए जाने के खिलाफ नवगठित अपीलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाने की इजाजत दे दी है। अदालत ने ट्रिब्यूनल से इस पर जल्द फैसला लेने को कहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) यानी विशेष मतदाता सूची संशोधन अभियान से जुड़ा है। कांग्रेस के स्थानीय नेता मोताब शेख आगामी चुनाव में पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनने की तैयारी में थे। लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान उनका नाम हटाए जाने वाली सूची में डाल दिया गया। इतना ही नहीं, इसके बाद वोटर लिस्ट से उनका नाम भी काट दिया गया।
वोटर लिस्ट से नाम हटने की वजह से मोताब शेख का चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शेख ने शीर्ष अदालत से गुहार लगाई कि उनका नाम मतदाता सूची में वापस जोड़ा जाए, जिससे वह चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गौर किया कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों की अध्यक्षता वाले अपीलीय ट्रिब्यूनल ने गुरुवार से ही काम करना शुरू कर दिया है।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने निर्देश दिया कि वे सीधे इस ट्रिब्यूनल के पास जाएं। अदालत ने कहा कि शेख कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल में अपनी अपील दायर कर सकते हैं।
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6 अप्रैल तक फैसले की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ट्रिब्यूनल के पीठासीन न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे चुनाव आयोग की मदद से इस अपील पर विचार करें और 6 अप्रैल की सुबह तक इस पर फैसला लेने की कोशिश करें। 6 अप्रैल को ही इस मुख्य मामले की अगली सुनवाई भी होनी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि वे इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करें। अदालत ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता के पास भारतीय पासपोर्ट है। इसलिए चुनाव आयोग को इन सभी तथ्यों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने शीर्ष अदालत में कहा कि अगर याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल जाते हैं, तो आयोग उनकी जायज शिकायतों को दूर करने में पूरी मदद करेगा।