सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक, गूगल, याहू और व्हाट्सएप आदि सोशल नेटवर्किंग साइट्स को यह बताने के लिए कहा है गत वर्ष जनवरी से अब तक उन्हें चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप और गैंगरेप संबंधित कितने आपत्तिजनक कंटेंट को अपलोड करने की शिकायत मिली है। साथ ही पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसने शिकायतों के आधार पर कितने मामले में कार्रवाई की है।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने फेसबुक, गूगल, याहू और व्हाट्सएप आदि सोशल नेटवर्किंग साइट्स को हलफनामे के जरिए उक्त जानकारी देने के लिए कहा है। साथ ही पीठ ने गृह मंत्रालय को यह बताने के लिए कहा कि उसने पोक्सो के प्रावधानों के तहत कितनों के खिलाफ अभियोग चलाया।
सोमवार को सुनवाई के दौरान इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों और सरकार के प्रतिनिधियों की कमेटी ने पीठ को बताया कि इन कंपनियों को कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर कुछ आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों का कहना है कि अदालत में सीलबंद लिफाफे में जमा कमेटी की रिपोर्ट उन्हें भी मुहैया कराई जाए।
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इनमें से एक कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें कमेटी की रिपोर्ट के बारे में तभी जानकारी मिल सकती है जब उन्हें रिपोर्ट की प्रति दी जाए। उन्होंने कहा कि वह भी जानना चाहते हैं कि आखिरकार कमेटी की सिफारिशें क्या हैं।
इस पर पीठ ने तीन दिनों के भीतर सभी कंपनियों को कमेटी की रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश देते हुए सुनवाई 18 सितंबर तक के लिए टाल दी।